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बारात में ऑर्केस्ट्रा पर हो रहा था नाच-गाना, मौलवी ने निकाह कराने से किया इनकार

लोहारीबारी गांव में 14 मई को आस मोहम्मद के घर उनकी बेटी गुड्डी खातून की शादी थी. बारात बनकटा क्षेत्र के अहिरौली बघेल से आई हुई थी. दूल्हे कमरूद्दीन के रिश्तेदार और दोस्त आर्केस्ट्रा के साथ बारात में जमकर नाच-गा रहे थे. ये सब देख निकाह कराने पहुंचे मौलवी नाराज हो गए. वो बिना निकाह कराए ही वहां से चले गए.

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बारात को साथ में ऑर्केस्ट्रा लाना और नाच-गाना महंगा पड़ा
बारात को साथ में ऑर्केस्ट्रा लाना और नाच-गाना महंगा पड़ा

देवरिया के एक गांव में बारात को साथ में ऑर्केस्ट्रा लाना और नाच-गाना महंगा पड़ा. खामपार थाना के लोहारीबारी गांव में ये सब होता देख मौलवी ने निकाह कराने से इनकार कर दिया. इसके बाद पूरी रात निकाह कराने वाले मौलवी को ढूंढ़ा जाता रहा लेकिन कामयाबी नहीं मिली. कोई मौलवी निकाह कराने को तैयार नहीं हुआ. अगली सुबह बड़ी मुश्किल से माफी मांगे जाने के बाद दूसरे मौलवी ने निकाह कराया.

लोहारीबारी गांव में 14 मई को आस मोहम्मद के घर उनकी बेटी गुड्डी खातून की शादी थी. बारात बनकटा क्षेत्र के अहिरौली बघेल से आई हुई थी. दूल्हे कमरुद्दीन के रिश्तेदार और दोस्त आर्केस्ट्रा के साथ बारात में जमकर नाच-गा रहे थे. ये सब देख निकाह कराने पहुंचे मौलवी नाराज हो गए. वो बिना निकाह कराए ही वहां से चले गए.

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दूल्हा और दुल्हन, दोनों पक्षों के लोगों ने फिर निकाह कराने के लिए दूसरे मौलवी को ढूंढना शुरू किया, लेकिन सबने ऑर्केस्ट्रा लाने को धर्म के विरुद्ध बताते हुए पहले मौलवी के रुख को सही ठहराया. अगली सुबह दूरदराज से एक मौलवी को लाया गया. इस मौलवी ने भी पहले माफीनामा लिखवाया, फिर निकाह कराया.

दुल्हन के पिता आस मोहम्मद का कहना है कि शादी में दहेज दिए जाने और बारात में गाजा-बाजा होने की जानकारी मौलवियों को दी थी. मौलवी बारात में नाच-गाना देखकर नाराज होकर चले गए. आस मोहम्मद ने सवाल किया कि जब दहेज पर कोई रोक नहीं लगाई जा रही है तो शादी जैसे खुशी के मौके पर नाच-बाजे पर रोक क्यों? समाज में सुधार लाना है तो पहले दहेज पर रोक लगा कर दिखाई जाए. दुल्हन की बहन मुन्नी खातून ने भी यही सवाल किया.

निकाह कराने वाले मौलवी रियाजुद्दीन ने कहा कि रविवार को आस मोहम्मद के घर बारात आई थी. बाराती ऑर्केस्ट्रा साथ लाए थे जिसकी वजह से रविवार को निकाह नहीं हुआ. निकाह कराने में विलंब की सजा इसीलिए दी गई कि समाज में सुधार आए और लोग समझें कि इस तरह के काम करना सही नहीं है.

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