उत्तर प्रदेश में जब से मदरसों के सर्वे की बात हुई है, मुस्लिम समाज का एक हिस्सा इससे खासा नाराज है और सरकार की नीयत पर सवाल उठा रहा है. इसी कड़ी में जमीयत उलेमा ए हिंद की तरफ से भी दो टूक कहा गया है कि सिर्फ मदरसों का सर्वे होना गलत है. उनके मुताबिक कई दूसरे ऐसे शिक्षण संस्थान भी हैं जो रेजिस्टर्ड नहीं चल रहे, ऐसे में उनका सर्वे होना भी जरूरी है.
सरकार की नीयत पर उठाए सवाल
जमीयत उलेमा-ए- हिंद के चीफ अरशद मदानी कहते हैं कि कुछ सांप्रदायिक ताकतों ने देश में नफरत फैलाने का काम किया है. इस पूरे मामले में सरकार की भूमिका ऐसी हो गई है कि जब भी योजना आती है मुस्लिम समाज को लगने लगता है कि ये उन्हें बर्बाद करने के लिए आई है. मदानी ने इस बात पर भी जोर दिया है कि देश में जितने भी मदरसे चल रहे हैं, वो संविधान के हिसाब से काम करते हैं. लेकिन कुछ ताकतें इन्हें खत्म करने की नीयत से काम कर रही हैं.
इसके बाद मदानी ने सवाल उठा दिया अगर सरकार को सही मायनों में सिर्फ अनअप्रूव स्कूल का ही सर्वे करना है, ऐसे में तो तमाम शिक्षण संस्थानों का सर्वे होना चाहिए. सिर्फ मदरसों के साथ ऐसा भेदभाव करना गलत है. वहीं मदानी ने ये भी कहा है कि अगर सरकार सिर्फ इतना जानना चाहती है कि कौन इन मदरसों को रन कर रहा है, किस जमीन पर इन्हें बनाया गया है, ऐसी तमाम जानकारी देने में किसी को कोई परहेज नहीं है.
यूपी में 16,461 मदरसे
अब जानकारी के लिए बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 31 अगस्त को यूपी के मदरसों का सर्वे करने का फैसला किया था. पाया गया था कि यूपी में कुल 16,461 मदरसा हैं, लेकिन सरकार के साथ रेजिस्टर्ड सिर्फ 560. इसी वजह से सभी मदरसों के सर्वे का फैसला लिया गया. तर्क दिया गया कि इसके जरिए जानने का प्रयास रहेगा कि मदरसों में कितने छात्र हैं, कितने शिक्षक हैं, कैसी सुविधाएं वसहां दी जा रही हैं. अभी के लिए कानपुर में तो इस प्रक्रिया को शुरू भी कर दिया गया है. वहां पर कुल 23 ऐसे मदरसे सामने आए हैं जो अनधिकृत बताए जा रहे हैं.