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बुलंदशहर में 62 फीसदी वोटिंग, 13 उम्मीदवारों की किस्मत EVM में बंद

बुलंदशहर संसदीय सीट से फिलहाल बीजेपी के भोला सिंह ही सांसद हैं. पिछले चुनाव में उन्होंने यहां से प्रचंड जीत हासिल की थी. बुलंदशहर का संसदीय इतिहास 1952 से ही कायम है और 1952 से लेकर 1971 तक यहां हुए पांच चुनाव में कांग्रेस ने लगातार जीत दर्ज की, लेकिन उसके बाद यहां पर मतदाताओं ने लगातार हुए चुनावों में अलग-अलग पार्टियों को तवज्जो दी.

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बुलंदशहर में जोरदार हो सकता है चुनावी मुकाबला (फाइल)
बुलंदशहर में जोरदार हो सकता है चुनावी मुकाबला (फाइल)

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर लोकसभा सीट पर दूसरे चरण के तहत गुरुवार को वोटिंग खत्म हो गई. लोगों में मतदान को लेकर उत्साह दिखा. इस चुनावी समर में यहां से 13 उम्मीदवार मैदान में हैं. मुख्य मुकाबला बीजेपी के निवर्तमान सांसद भोला सिंह, कांग्रेस के बंशी सिंह और बसपा के योगेश वर्मा के बीच है. 4 निर्दलीय प्रत्याशियों के अलावा मैदान में 6 अन्य छोटे दलों के उम्मीदवार भी हैं.

UPDATES...

- लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के तहत गुरुवार को 11 राज्यों और एक संघ शासित प्रदेश में मतदान कराया गया. शुक्रवार दोपहर 3 बजे के अपडेट के अनुसार 12 राज्यों में 95 संसदीय सीटों पर 69.04 फीसदी मतदान हुआ. बंगाल में 80.72% मतदान हुआ. जबकि यूपी में 62.17 फीसदी वोटिंग हुई.

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- लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के तहत गुरुवार को उत्तर प्रदेश के 8 संसदीय सीटों पर मतदान कराया गया. पूरे प्रदेश में 62.30 फीसदी वोटिंग हुई. बुलंदशहर लोकसभा सीट पर अंतिम अपडेट (शाम 6 बजे) होने तक 62.14 फीसदी वोटिंग हुई.

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- लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के तहत गुरुवार को 11 राज्यों और एक संघ शासित प्रदेश में मतदान कराया गया. 12 राज्यों में 95 संसदीय सीटों पर 66.21 फीसदी मतदान हुआ.

- चुनाव आयोग के मुताबिक बुलंदशहर सीट पर दूसरे चरण में कुल 62.14 फीसद वोट पड़े.

- बुलंदशहर में शाम 5 बजे तक 56.61 फीसदी वोटिंग दर्ज.

- बुलंदशहर लोकसभा सीट पर मतदान में तेजी, दोपहर 1 बजे तक 39.70 फीसद वोटिंग.

- बुलंदशहर लोकसभा सीट पर 11 बजे तक 25 फीसदी मतदान.

- बुलंदशहर में एक पोलिंग बूथ पर सुरक्षाकर्मियों से बीजेपी उम्मीदवार भोला सिंह की तीखी बहस हुई. पोलिंग बूथ पर जाने से रोकने पर भोला सिंह भड़क गए. 

- बुलंदशहर लोकसभा सीट पर शुरुआती 2 घंटे में 11.40 फीसदी मतदान.

-पोलिंग बूथों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं.

अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित बुलंदशहर लोकसभा सीट से 2019 में कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है.

1952 से कांग्रेस की धमाकेदार शुरुआत

बुलंदशहर संसदीय सीट से फिलहाल बीजेपी के भोला सिंह ही सांसद हैं. पिछले चुनाव में उन्होंने यहां से प्रचंड जीत हासिल की थी. बुलंदशहर का संसदीय इतिहास 1952 से ही कायम है और 1952 से लेकर 1971 तक यहां हुए पांच चुनाव में कांग्रेस ने लगातार जीत दर्ज की, लेकिन उसके बाद यहां पर मतदाताओं ने लगातार हुए चुनावों में अलग-अलग पार्टियों को तवज्जो दी. 1977 में भारतीय लोक दल, 1980 में जनता दल ने यहां कांग्रेस को करारी मात दी थी. लेकिन 1984 में कांग्रेस वापसी करने में कामयाब रही.

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हालांकि 1989 के बाद से कांग्रेस यहां पर वापसी के लिए संघर्ष कर रही है. 1989 चुनाव में जनता दल के जीत दर्ज करने के बाद 90 के दशक में राम लहर के दौर में 1991 से लेकर 2004 तक लगातार पांच बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने चुनाव हासिल की. इस दौरान 1991 से 1999 तक बीजेपी के छतरपाल सिंह ने इस सीट पर अपना दबदबा बनाए रखा. 2004 में भी बीजेपी को यहां से जीत मिली थी. 2009 में यहां समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार कमलेश वाल्मिकी ने बड़ी जीत दर्ज की, लेकिन 2014 में देश में चली मोदी लहर का असर यहां भी दिखा और बीजेपी ने जीत हासिल की.

बुलंदशहर में 77 फीसदी आबादी हिंदू

2014 में लोकसभा चुनाव के अनुसार इस सीट पर 17 लाख से अधिक वोटर हैं. इनमें 9 लाख से अधिक पुरुष और करीब 8 लाख महिला वोटर हैं. बुलंदशहर में करीब 77 फीसदी हिंदू और 22 फीसदी मुस्लिम आबादी रहती हैं. बुलंदशहर लोकसभा के अंतर्गत कुल 5 विधानसभा अनूपशहर, बुलंदशहर, डिबाई, शिकारपुर और स्याना विधानसभा सीटें आती हैं. 2017 विधानसभा चुनाव में इन सभी 5 सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की है.

बुलंदशहर की ही स्याना विधानसभा सीट वही जगह है जहां पर 2018 के आखिर में गोहत्या के शक में हिंसा हुई थी. इस हिंसा में एक पुलिसकर्मी और एक युवक की मौत हो गई थी. बुलंदशहर हिंसा ने राजनीतिक तौर पर काफी सुर्खियां बटोरी थीं.

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2014 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में मोदी लहर दिखा जिस कारण बीजेपी का जादू चला था. बुलंदशहर में भी बीजेपी के भोला सिंह को प्रचंड जीत हासिल की थी. 2014 के चुनाव में भोला सिंह को 60 फीसदी वोट मिले थे, कुल पड़े 10 लाख वोटों में से उन्हें करीब 6 लाख वोट मिले थे. बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी प्रदीप कुमार जाटव को 1 लाख 82 हजार वोट मिले थे. 2014 के चुनाव में यहां सिर्फ 58 फीसदी मतदान हुआ था.

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