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यूपी में चीनी के बढ़ रहे दामों की वजह सट्टेबाजी, 6 महीने में 8 रुपये किलो तक की बढ़ोतरी

घरेलू बाजार में चीनी अंतर्राष्ट्रीय बाजार से महंगी हो गई है. 6 माह पहले के रिकॉर्ड गिरावट के बाद चीनी के दामों में जबरदस्त उछाल आया है. पिछले 6 माह में ही चीनी के फुटकर दामों में 10 से 12 रुपए की तेजी आ चुकी है.

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चीनी के बढ़े दामों के लिए सट्टेबाज जिम्मेदार
चीनी के बढ़े दामों के लिए सट्टेबाज जिम्मेदार

उत्तर प्रदेश में बीते 6 महीनों के अंदर थोक में चीनी के दाम 7 से 8 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ गए हैं. अब इसकी वजह सट्टेबाजी को बताया जा रहा है. पिछले 6 महीने में चीनी की कीमत में करीब 25 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है. फुटकर में पिछले चार पहले चीनी के दाम 28 रुपये किलो थे. लेकिन वंही मौजूदा समय में चीनी 40 रुपये किलो के स्तर पर पंहुच गई है.

घरेलू बाजार में चीनी अंतर्राष्ट्रीय बाजार से महंगी हो गई है. 6 माह पहले के रिकॉर्ड गिरावट के बाद चीनी के दामों में जबरदस्त उछाल आया है. पिछले 6 माह में ही चीनी के फुटकर दामों में 10 से 12 रुपये की तेजी आ चुकी है. 6 माह पहले थोक में चीनी के दाम 2800 से 2850 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए थे. लेकिन अब ये दाम 3600 से 3800 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गए हैं. जिसकी वजह से रिटेल में चीनी 40 रुपये किलो तक बिक रही है. और थोक व्यापारियों के मुताबिक दामों मे ये बढ़ोतरी डिमांड और सप्लाई मे अंतर की वजह से नहीं बल्कि सट्टेबाजी के कारण हो रही है.

जरूरत से ज्यादा है चीनी का स्टॉक
चीनी की कीमतों में तेजी के लिए थोक विक्रेता और फुटकर विक्रेताओ ने सट्टेबाजियों को जिम्मेदार ठहराया है. उनके मुताबिक, प्रदेश में चीनी का उपलब्ध स्टॉक जरूरत से ज्यादा है और इससे कीमतों को स्थिर करने में मदद मिलेगी. फुटकर विक्रेता राकेश ने बताया कि पिछले एक महीनें में चीनी के दाम में काफी इजाफा हुआ है. जिससे चीनी 40 रुपये प्रति किलोग्राम पंहुच गई है. राकेश केसरवानी ने कहा कि चीनी माफियाओ का बोलबाला है वो अपने हिसाब से स्टॉक करते हैं और बाद में अपने ही तरीके से रेट खोलते हैं. जिससे थोक विक्रेता को जो मिलता है उसी के हिसाब से हम लोगो को चीनी के दामो में मार्जिन मिलता है.

लखनऊ के अमीनाबाद में चीनी की थोक मण्डी में आज तक ने पड़ताल की. यहां आकर पता चला कि पिछले 4-6 महीनो में चीनी के थोक के भाव में तकरीबन 6 से 8 रुपये की प्रति क्विंटल बढ़ोतरी हुई है. और बढ़ोतरी का कारण चीनी की डिमाण्ड और सप्लाई में अन्तर नहीं बल्कि ट्रेडिंग और सट्टेबाजी है.

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