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आठ घंटे चला ऑपरेशन, 2 घंटे बंद रहीं सांस फिर भी जिंदा रहा मरीज

किसी इंसान की धड़कन अगर बंद हो जाए तो उसकी मौत हो जाती है, लेकिन बीएचयू के डॉक्टरों ने जानबूझकर एक मरीज के दिल की धड़कन दो घंटे तक रोक दी. ये अलग बात है कि डॉक्टरों ने यह कदम मरीज की जान बचाने के लिए उठाया और वह उसमें सफल भी रहे.

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किसी इंसान की धड़कन अगर बंद हो जाए तो उसकी मौत हो जाती है, लेकिन बीएचयू के डॉक्टरों ने जानबूझकर एक मरीज के दिल की धड़कन दो घंटे तक रोक दी. ये अलग बात है कि डॉक्टरों ने यह कदम मरीज की जान बचाने के लिए उठाया और वह उसमें सफल भी रहे.

दरअसल, बीएचयू में गंभीर हालत में एक युवक को भर्ती कराया गया. मरीज को ट्यूबरकुलर कन्सट्रक्टिव पेरिकार्डाइटिस और आस्टियम सेकोन्डम एएसडी बीमारियां थीं. 'नव भारत टाइम्स' की खबर के मुताबिक, इस जटिल बीमारी के इलाज के लिए डॉक्टरों ने आठ घंटे तक ऑपरेशन किया. इस ऑपरेशन में टोटल सर्कुलेटरी अरेस्ट नामक एक विशेष तकनीक का प्रयोग किया गया. इस तकनीक में पूरे शरीर के तापमान को 20 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा किया गया, जो शरीर के सामान्य तापमान से 17 डिग्री सेल्सियस कम है. इस दौरान पूरे शरीर में खून का प्रवाह बंद करने के साथ हृदय, दिमाग और अन्य महत्वपूर्ण अंगों को विशेष तकनीक की सहायता से सुरक्षित रखा गया.

बीएचयू में जिस मरीज के दिल का आपरेशन डॉक्टरों ने किया है, उसकी उम्र 22 साल है. इस युवक के पूरे शरीर में सूजन थी. जरा सी मेहनत करने पर उसकी सांस फूलने लगती थी. इसके दिल को घेरने वाली भित्तीयां, जिसे पेरिकार्डियम कहते हैं वह मोटी हो गई थी. इसके अलावा इस मरीज को जन्म के समय से ही हृदय के उपरी भाग में एक छेद था जिसे एएसडी कहते हैं. इस ऑपरेशन का आंशिक खर्च मुख्यमंत्री सहायता कोश से दिया गया था.

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इस अनूठी सर्जरी टीम में कार्डियोथोरैसिक सर्जन डॉक्टर मुकेश कुमावत और ऐनेस्थिसिया के प्रफेसर एसके माथुर समेत कई ड़क्टर थे. बीएचयू में 150 से ज्यादा सफल ओपेन हार्ट सर्जरी करने वाले डॉक्टर सिद्धार्थ लखोटिया ने बताया कि इस तरह के केस पूरी दुनिया में बहुत ही कम देखने को मिलते है. दिल में कई बीमारियों के लिए हुए इस ऑपरेशन में 'लो फ्लो कार्डियोपल्मनरी बाईपास और टोटल सर्कुलेटरी का प्रयोग पहली बार किया गया है.

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