कोरोना वायरस और लॉकडाउन से चल रही जंग के बीच कांग्रेस और बीजेपी में मजदूरों पर सियासत हो रही है. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने मजदूरों के लिये बस चलाने की डिमांड रखी तो यूपी सरकार ने इजाजत दे दी. लेकिन सरकार ने कांग्रेस की बसों की लिस्ट का पोस्टमॉर्टम भी कर दिया. कई वाहनों के थ्री व्हीलर और टू व्हीलर होने का दावा किया गया. लेकिन इस सबके बीच जो बसें मजदूरों को उनके घर तक छोड़ सकती हैं उन्हें भी फिलहाल प्रशासन की मंजूरी नहीं मिली है. मामला थाने तक पहुंच गया है और बसें अभी तक यूपी बॉर्डर पर ही खड़ी हैं.
मंगलवार को दिनभर इस मसले पर बवाल मचा. आगरा में हालात यहां तक पहुंच गये कि कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता सड़क पर उतर आये. आगरा में राजस्थान की सीमा पर कांग्रेस नेता धरने पर बैठ गए. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू की मौजूदगी में योगी सरकार के खिलाफ नारेबाजी हुई. इस दौरान पुलिस और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच जमकर नोकझोंक भी हुई. पुलिस ने हाइवे पर ट्रकों और अपने वाहनों को खड़ा कर रास्ता रोक दिया. कांग्रेस कार्यकर्ता यूपी सीमा में बसों की एंट्री की इजाजत मांग रहे थे. वहीं, पुलिस ने उनसे बसों के परमिट और कागजात मांगे.
इस पूरे घटनाक्रम पर फतेहपुर सीकरी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कर ली गई. यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमाल लल्लू और विवेक बंसल को हिरासत में ले लिया गया. आगरा के एसएसपी बब्लू कुमार ने बताया कि दोनों को हिरासत में लिया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है.
वहीं दूसरी तरफ लखनऊ के हजरतगंज थाने में अजय कुमार लल्लू और प्रियंका गांधी के निजी सचिव संदीप सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. इन पर बसों की गलत जानकारी देने का आरोप है.
प्रियंका गांधी ने कहा- बीजेपी अपने पोस्टर लगा ले
इस पूरी घटना पर प्रियंका गांधी भी मैदान में उतर आईं और उन्होंने योगी सरकार के खिलाफ कई ट्वीट किये. प्रियंका गांधी ने लिखा, 'उप्र सरकार का खुद का बयान है कि हमारी 1049 बसों में से 879 बसें जांच में सही पाई गईं. ऊंचा नागला बॉर्डर पर आपके प्रशासन ने हमारी 500 से ज्यादा बसों को घंटों से रोक रखा है. इधर, दिल्ली बॉर्डर पर भी 300 से ज्यादा बसें पहुंच रही हैं. कृपया इन 879 बसों को तो चलने दीजिए.' प्रियंका गांधी ने योगी सरकार से ये भी कहा कि हम आपको कल 200 बसों की नई सूची दिलाकर बसें उपलब्ध करा देंगे. प्रियंका ने यहां तक कह दिया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन बसों पर आप चाहें तो बीजेपी का बैनर लगा दीजिए, अपने पोस्टर बेशक लगा दीजिए लेकिन हमारे सेवा भाव को मत ठुकराइए.
#आदित्यनाथ_का_अत्याचार https://t.co/VhOoD6XdQC
— UP Congress (@INCUttarPradesh) May 19, 2020
दरअसल, ये खींचतान बसों के रजिस्ट्रेशन नंबर को लेकर शुरू हुई. कांग्रेस ने जिन एक हजार बसों की लिस्ट यूपी सरकार को सौंपी थी उनमें से कई के रजिस्ट्रेशन थ्री व्हीलर, टू व्हीलर और यहां तक कि एंबुलेंस के नाम पर पाए गये. इस पर योगी सरकार और बीजेपी ने कांग्रेस को निशाने पर ले लिया. पूरा दिन कांग्रेस पर बसों की गलत जानकारी देने के आरोप लगते रहे, जबकि कांग्रेस की तरफ से कहा जाता रहा कि 800 से ज्यादा बसें तो सही कागजात वाली हैं, उनका ही इस्तेमाल कर मजदूरों को उनके घर पहुंचा दिया जाये.
प्रियंका गांधी के निजी सचिव ने यूपी सरकार को एक और खत लिख दिया है और कहा है कि नोएडा बॉर्डर पर 100 बसें खड़ी हैं, लेकिन प्रशासन इजाजत नहीं दे रहा है. उन्होंने कहा कि ये बसें बुधवार शाम तक यहीं रहेंगी.
यानी मजदूर घर जाने को बेबस हैं. कोई सड़कों से पैदल निकल चुका है तो कोई ट्रकों में भर भरकर जा रहा है लेकिन सियासत का खेल खत्म नहीं हो रहा है और बॉर्डर पर बसें होने के बावजूद भी अब तक कोई मजदूर इसका फायदा नहीं उठा सका है.