अब इसे संयोग कहिए या कुछ और. उन्नाव के डौंडियाखेड़ा में संत शोभन सरकार का खजाने का सपना भले सच न हुआ, लेकिन आगरा में जगनेर के खौरपुरा गांव में सपने के आधार पर नौ लड़कियों द्वारा किए गए दावे के मुताबिक 15 फीट खुदाई के बाद ‘देवी की प्रतिमा’ निकल आई.
इस इलाके में बहुतायत में पाए जाने वाले पत्थर के अनगढ़ टुकड़े पर आंख-मुंह की आकृति खोदी गई सी दिखती है. मुंह के नीचे की आकृति को जीभ बताते हुए इसे काली माता की प्रतिमा बताते हुए पूजा-अर्चना भी शुरू कर दी गई है.
सपना देखने वाली नौ लड़कियों ने भी अपना ‘तप’ समाप्त कर दिया है यद्यपि उन्हें देवी रूप मानकर पूज रहे लोग अब भी उनके जयकारे लगा रहे हैं. दरअसल 'प्रतिमा’ मिलने ही वाली है, इसके संकेत तो एक दिन पहले ही मिल गए थे, जब करीब 14 फीट की खोदाई में एक और शिला (इसे भैरो मूर्ति कहा जा रहा है) मिलने के बाद पत्थर का एक टुकड़ा दिखने लगा था तभी खुदाई बंद करा दी गई. पत्थर को चुनरी से ढंक दिया गया था. भैरो मूर्ति खोदे गए गड्ढे में ही रहने दी गई.
पूजन किए जाने के बाद भी किसी को उसके पास नहीं जाने दिया गया था. इन सबसे पहले भी एक शिला निकली थी जिसे देवी की मूर्ति बताते हुए खननस्थल के पास ही स्थापित कर दिया गया था. सुबह 11 बजे जैसे ही 15 फीट की खुदाई पूरी हुई तभी शिला दिखाई देने लगी. इसके बाद लोग जयकारे लगाने लगे. देर रात तक पूजा पाठ चलता रहा.