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यस बैंक घोटाला: एक मई तक CBI हिरासत में भेजे गए DHFL के प्रमोटर वधावन बंधु

बुधवार को सीबीआई ने चार मई तक के लिए वधावन बंधुओं की हिरासत मांगी थी, लेकिन अदालत ने एक मई तक हिरासत में भेजने का आदेश दिया. सीबीआई ने अदालत को बताया कि वधावन बंधु यस बैंक धोखाधड़ी मामले की जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं.

कपिल वधावन, प्रमोटर DHFL (फाइल फोटो) कपिल वधावन, प्रमोटर DHFL (फाइल फोटो)

  • सीबीआई ने कहा- कई बार समन भेजने के बावजूद जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे आरोपी
  • कोर्ट ने CBI की दलील सुनने के बाद वधावन बंधुओं को मिली गिरफ्तारी से राहत रद्द की

मुंबई की सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने बुधवार को यस बैंक धोखाधड़ी मामले में दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) के प्रमोटर कपिल वधावन और उनके भाई धीरज वधावन की सीबीआई हिरासत एक मई तक के लिए बढ़ा दी है.

बुधवार को सीबीआई ने चार मई तक के लिए वधावन बंधुओं की हिरासत मांगी थी, लेकिन अदालत ने एक मई तक हिरासत में भेजने का आदेश दिया. सीबीआई ने अदालत को बताया कि वधावन बंधु यस बैंक धोखाधड़ी मामले की जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं.

रविवार को सीबीआई ने वधावन बंधुओं को महाराष्ट्र के सतारा जिले के महाबलेश्वर से गिरफ्तार किया था. इनकी गिरफ्तारी क्वारनटीन से रिहाई के बाद की गई थी. सीबीआई ने सात मार्च को यस बैंक के को-फाउंडर राणा कपूर, वधावन बंधुओं समेत अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था.

इसके बाद सीबीआई ने वधावन बंधुओं को समन भेजा था, लेकिन दोनों सीबीआई के सामने पेश नहीं हुए थे और फरार हो गए थे. सीबीआई ने बताया कि वधावन बंधुओं को कई बार समन भी भेजा गया था, लेकिन वो पेश नहीं हुए थे.

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सीबीआई के प्रवक्ता ने बताया कि मुंबई की सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने 17 मार्च को वधावन बंधुओं के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था. अधिकारियों का कहना है कि गैर जमानती वारंट जारी होने के बावजूद वधावन बंधु सीबीआई के सामने पेश नहीं हुए थे.

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दरअसल, वधावन बंधुओं ने गैर जमानती वारंट पर पांच मई तक रोक लगाने के लिए स्टे ले लिया था, लेकिन बाद में सीबीआई की दलील सुनने के बाद अदालत ने स्टे आदेश को रद्द कर दिया. महाराष्ट्र पुलिस ने सतारा में वधावन परिवार को देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान गिरफ्तार किया था. 9 अप्रैल को लॉकडाउन तोड़कर वधावन परिवार महाबलेश्वर पहुंचा था. इसके बाद इनको क्वारनटीन किया गया था, जिसके बाद सीबीआई ने इनको हिरासत में लिया था.

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राणा कपूर के साथ चल रहे मामले की सीबीआई जांच में पता चला कि उन्हें और उनके परिवार के सदस्यों को डीएचएफएल के प्रमोटर कपिल वधावन द्वारा बिल्डर लोन की आड़ में 600 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था.

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