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सर्वदलीय बैठक खत्म, 'गरम' होगा संसद की शीत सत्र!

शीतकालीन सत्र को लेकर स्पीकर मीरा कुमार ने जो सर्वदलीय बैठक बुलाई थी वो खत्म हो गई है. मीरा कुमार ने सभी पार्टियों से गुजारिश की कि शीत सत्र के दौरान संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने में सभी पार्टियां मदद करें. वहीं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि तेलंगाना के गठन को लेकर सरकार प्रतिबद्ध है.

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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

शीतकालीन सत्र को लेकर स्पीकर मीरा कुमार ने जो सर्वदलीय बैठक बुलाई थी वो खत्म हो गई है. मीरा कुमार ने सभी पार्टियों से गुजारिश की कि शीत सत्र के दौरान संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सभी पार्टियां मदद करें. वहीं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि तेलंगाना के गठन को लेकर सरकार प्रतिबद्ध है.

मीरा कुमार ने बैठक के बाद कहा, 'मैं सभी पार्टियों से गुजारिश करती हूं कि संसद की कार्यवाही बिना बाधा के पूरी हो. सभी बिल जरूरी हैं और उनकी प्राथमिकता तय करना स्पीकर का काम नहीं है. शीतकालीन सत्र महज 12 दिन का होगा लेकिन इसमें बहुत से मुद्दे हैं. हमनें महिला आरक्षण विधेयक पर बात की, ये लंबे समय से पेंडिंग है. हमने तय किया था कि हम सभी पार्टियों से इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे. सर्वदलीय बैठक में सबी पार्टियों ने अपनी राय दी.'

वहीं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, 'शीतकालीन सत्र 5 दिसंबर से शुरू होगा और 20 दिसंबर तक चलेगा. इस दौरान कई विवादित मुद्दों पर भी चर्चा होगी. ये सभी लोगों की जिम्मेदारी होगी कि इस सत्र ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाया जाए.'

उन्होंने कहा, 'मैं सरकार की ओर से भरोसा दिलाता हूं कि संसद की कार्यवादी में बाधा न आए इसकी पूरी कोशिश की जाएगी. सरकार तेलंगाना के गठन को लेकर प्रतिबद्द है.'

माना जा रहा है कि गुरुवार से शुरू होने जा रहा संसद का शीतकालीन सत्र हंगामेदार होगा. सियासी पार्टियों ने बयानों के जरिए अभी से ही घमासान के संकेत दे दिए हैं.

शीतकालीन सत्र में बहुचर्चित महिला आरक्षण विधेयक और लोकपाल विधेयक पारित कराना सरकार की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर हैं. दूसरी ओर समाजवादी पार्टी ने कहा है कि अगर विवादित बिल पेश हुआ, वह संसद नहीं चलने देगी.

वहीं बीजेपी और एजीपी (असम गण परिषद) ने भारत-बांग्लादेश भूमि सीमा समझौते पर संविधान संशोधन विधेयक लाए जाने की किसी योजना का भारी विरोध किया.

राज्यसभा में पास हो चुका है महिला आरक्षण विधेयक
महिला आरक्षण विधेयक राज्यसभा में पारित हो चुका है और लोकसभा से मंजूरी का इंतजार है. वहीं लोकपाल विधेयक लोकसभा में पारित हो चुका है और यह ऊपरी सदन में लंबित है. गृहमंत्री और लोकसभा में सदन के नेता सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि कैबिनेट से इसे जल्दी ही मंजूरी मिल जाएगी और इसे सदन में पेश करने के पहले राष्ट्रपति के पास उनकी सहमति के लिए भेजा जाएगा.

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