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किसके इशारे पर बंद हुआ जमीन घोटालों पर CAG का ऑडिट?

हरियाणा में जमीनों के लाइसेंस और उनकी बंदरबाट किसी से छिपी नहीं है, खासकर आईएएस अधिकारी अशोक खेमका के रॉबर्ट वाड्रा और डीएलएफ की मिलीभगत को उजागर करने के बाद कई बड़ी कंपनियां भी सवालों के घेरे में आ गई थीं. लेकिन अब एक और गंभीर मामला सामने आया है.

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IAS अशोक खेमका
IAS अशोक खेमका

हरियाणा में जमीनों के लाइसेंस और उनकी बंदरबाट किसी से छिपी नहीं है, खासकर आईएएस अधिकारी अशोक खेमका के रॉबर्ट वाड्रा और डीएलएफ की मिलीभगत को उजागर करने के बाद कई बड़ी कंपनियां भी सवालों के घेरे में आ गई थीं. लेकिन अब एक और गंभीर मामला सामने आया है.

हरियाणा में सीएजी ने भूमि से जुड़े मामलों का ऑडिट शुरू कर दिया था, यहां तक भी कहा गया था की कंट्री और टाउन प्लानिंग विभाग सहयोग नहीं कर रहा है, लेकिन अचानक सीएजी ने अपना ऑडिट बंद कर दिया है. दस्तावेज कह रहे हैं की ये ऑडिट दिल्ली के सीएजी ऑफिस से आए आदेशों पर बंद किया गया है. साथ ही बंद करने की वजह न बताए जाने से कई सवाल भी अपने आप खड़े हो रहे हैं.

आईएएस अधिकारी और उस समय के चकबंदी निदेशक अशोक खेमका ने रॉबर्ट वाड्रा जमीन केस के बाद कई ऐसे केसों का हवाला दिया था जिनमें काफी अनियमितताएं पाई गई थीं और जिनमें घोटालों का शक जाहिर किया गया था. खुद खेमका ने मांग की थी की इन सारे मामलों का ऑडिट सीएजी से कराया जाए और इस मांग को उस समय के सीएजी ने न सिर्फ स्वीकार किया था बल्कि इस पर काम भी शुरू कर दिया था.

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लेकिन इसी साल जून में दिल्ली सीएजी ने चंडीगढ़ स्थित प्रिंसिपल ऑडिटर जनरल को ये ऑडिट रोकने के लिए कहा है. आप इसे खुद पढ़ भी सकते हैं, फिलहाल खेमका के वकील और कानून के जानकार इस ममाले पर हैरानी जाता रहे हैं.

खेमका के वकील अनुपम गुप्ता ने कहा, 'एक जांच को शुरू करना और फिर बंद कर देना काफी आश्चर्यजनक है, लेकिन सीएजी भी जवाबदेह है. संविधान की जानकारी के हिसाब से मुझे लगता है की सीएजी को इस पर जवाब देना चाहिए की ऐसा क्यों किया गया है.'

ऐसी भी जानकारी है कि सीएजी ने इस सारे मामले की जांच के समय ये भी कहा था कि हरियाणा के कंट्री और टाउन प्लानिंग विभाग की तरफ से पूरा सहयोग नहीं मिल रहा है और ऑडिट में दिक्कतें आ रही हैं, लेकिन अचानक ऐसा क्या हुआ कि पूरे मामले की जांच को रोक ही दिया गया. फिलहाल इस मामले पर न तो हरियाणा सरकार और न ही सीएजी कुछ भी कह रही है.

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