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पंचायत चुनावः हर तीसरा TMC प्रत्याशी निर्विरोध जीता, दशकों पुराना है ये खेल!

पश्चिम बंगाल के 20 जिलों के 48 हजार 606 ग्राम पंचायत, 9 हजार 217 पंचायत समिति और 8 हजार 25 जिला परिषद सीटों के लिए 1, 3 और 5 मई को वोट डाले जाएंगे. पंचायत चुनाव के नामांकन की सोमवार को अंतिम तारीख थी. टीएमसी उम्मीदवार बड़ी संख्या में निर्विरोध निर्वाचित हुए.

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पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. इसके बाद बड़ी संख्या में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं. आरोप हैं कि टीएमसी ने विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन पत्र भरने से रोका. वैसे राज्य के स्थानीय चुनावों में विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन न भरने देकर निर्विरोध निर्वाचित होने का खेल नया नहीं है. पहले वामपंथी दल और उसके बाद टीएमसी ऐसा करती रही है.

20 जिलों के पंचायत चुनाव तीन चरण में

पश्चिम बंगाल की जिला पंचायत, ग्राम पंचायत और पंचायत समिति के लिए तीन चरण में चुनाव होंगे. पश्चिम बंगाल के 20 जिलों के 48 हजार 606 ग्राम पंचायत, 9 हजार 217 पंचायत समिति और 8 हजार 25 जिला परिषद सीटों के लिए 1, 3 और 5 मई को वोट डाले जाएंगे. पंचायत चुनाव के नामांकन की सोमवार को अंतिम तारीख थी. टीएमसी उम्मीदवार बड़ी संख्या में निर्विरोध निर्वाचित हुए.

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रिकॉर्ड टीएमसी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित

टीएमसी ने इस बार के पंचायत चुनाव में रिकॉर्ड बनाया है. टीएमसी ने करीब 30 फीसदी पंचायत सीटों पर निर्विरोध जीत दर्ज की है. बीरभूमि जिले के उदाहरण के तौर पर देखें तो जिले की 42 जिला परिषद सीटों में से 41, 19 पंचायत समिति के 14 और 167 ग्राम पंचायतों में से 131 पर टीएमसी उम्मीदवारों ने निर्विरोध जीत हासिल की है. मुर्शिदाबाद में भी टीएमसी ने 30 पंचायत समितियों में से 29 पर निर्विरोध जीत हासिल की है. भरतपुर द्वितीय में टीएमसी ने 21 पंचायत समितियों की सीट पर जीत हासिल की है. इसी तरह की कहानी बर्दवान में भी ममता बनर्जी की पार्टी ने दोहराई है, जहां उसने सभी 39 पंचायत समितियों की सीट पर अपनी पताका फहराई है.

विपक्ष ने सवाल खड़े किए

सीपीएम विधायक सुजन चक्रवर्ती ने कहा कि टीएमसी ने ग्रामीण इलाकों में जीत हासिल नहीं की है, बल्कि उन पर कब्जा कर लिया है. विपक्षी पार्टियों को नामांकन नहीं करने दिया है. इसी तरह से बीजेपी ने भी टीएमसी पर नामांकन नहीं करने देने का आरोप लगाया है.

विपक्ष के पास उम्मीदवार की कमी: TMC

तृणमूल के महासचिव पार्थ चटर्जी ने कहा कि विपक्ष में चुनाव लड़ने की संगठनात्मक ताकत नहीं थी और सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ दुर्व्यवहार और हिंसा के आरोपों के साथ इस कमी को पूरा करने की वो कोशिश कर रहे थे. चटर्जी ने कहा, 'ममता बनर्जी सरकार द्वारा दिए गए विकास से लोग खुश हैं और विपक्ष उम्मीदवारों को खोजने के लिए असमर्थ हैं. इसीलिए वो बहाने बनाने के लिए अनाप-शनाप आरोप लगा रहे हैं.

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पश्चिम बंगाल में टीएमसी राज में ही नहीं बल्कि लेफ्ट के दौर में भी पंचायत चुनाव में विपक्ष के उम्मीदवारों को नामांकन न करने देने के आरोप लगते रहे हैं. लेफ्ट शासन में भी पंचायत चुनाव में निर्विरोध निर्वाचन का खेल जमकर खेला जाता था.

40 साल का पंचायत चुनाव का रिकॉर्ड

पश्चिम बंगाल में लेफ्ट का शासन 1973 में आया था. पांच साल के बाद 1978 के पंचायत चुनाव में 338 सदस्य निर्विरोध निर्वाचित हुए. इसके बाद 1983 में 332, 1988 में रिकार्ड स्तर पर 4200 पंचायत सदस्य निर्विरोध निर्वाचित हुए. 1993 में 1716, 1998 में 680 पंचायत सदस्य निर्विरोध निर्वाचित हुए. इसके बाद एक बार फिर 2003 में 6800 और 2008 में 2845 सदस्य निर्विरोध निर्वाचित हुए. लेफ्ट के शासन के पतन के बाद टीएमसी राज में भी ये खेल यथावत जारी रहा.

2013 के पंचायत चुनाव में सबसे बड़ी संख्या में पंचायत सदस्य निर्विरोध निर्वाचित हुए. इस साल 6278 सदस्य चुने गए. 2018 के पूरे आंकड़े अभी नहीं आए हैं. माना जा रहा है कि इस बार करीब 30 फीसदी पंचायत सदस्य निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं.

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