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हम दिल्ली विधानसभा और लोकसभा चुनाव के लिए तैयार हैं: अरविंद केजरीवाल

बुधवार को दिल्ली के जंतर मंतर में आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हम दिल्ली विधानसभा के साथ साथ लोकसभा चुनाव के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा कि हम अन्ना के साथ हैं और कल ही मैं कुमार विश्वास के साथ रालेगण सिद्धि जा रहा हूं अन्ना जी से मिलने. केजरीवाल ने कहा कि हमें चुनाव लड़ने के लिए पैसा चाहिए, आप दिल खोलकर दान दें.

जंतर मंतर पर बोलते अरविंद केजरीवाल जंतर मंतर पर बोलते अरविंद केजरीवाल

बुधवार को दिल्ली के जंतर मंतर में आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हम दिल्ली विधानसभा के साथ-साथ लोकसभा चुनाव के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा कि हम अन्ना के साथ हैं और कल ही मैं कुमार विश्वास के साथ रालेगण सिद्धि जा रहा हूं अन्ना जी से मिलने. केजरीवाल ने कहा कि हमें चुनाव लड़ने के लिए पैसा चाहिए, आप दिल खोलकर दान दें. उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक पार्टी या व्यवसाय के ईमानदार लोग हमारे साथ जुड़ें क्योंकि ये लोगों की लडा़ई है.

क्या बोले अरविंद केजरीवाल चुनाव के बाद पार्टी की पहली रैली में,  उन्हीं के शब्दों में पूरी बात
दोस्तों. मेरा गला बहुत खराब है, आप शांत हों तो बोलूं.
सबसे पहले कुछ लोगों को ये गलतफहमी है कि हम लोग आज जश्न मनाने के लिए इकट्ठे हुए हैं. ये गलत है, जब तक इस देश में करप्शन, भुखमरी, अशिक्षा और गरीबी है, हम कैसे जश्न मना सकते हैं.कोई चुनाव जीतकर सत्ता में आना हमारा मकसद नहीं था. कोई चुनाव जीतकर 28 सीट हासिल करना हमारा मकसद नहीं था. ये जश्न नहीं वॉलंटियर्स की मीटिंग है.
सबसे पहले मैं आज इस मीटिंग में संतोष कोली बहन को श्रद्धांजलि अर्पित करना चाहूंगा. संतोष बहन आजादी की इस दूसरी लड़ाई में शहीद हो गईं. हिंदू धर्म में कहा जाता है कि शरीर नश्वर है, आत्मा अमर है. संतोष बहन की आत्मा को आज बहुत शांति मिलेगी कि उनकी लड़ाई को हम आगे लेकर जा रहे हैं और देश एक दिन भ्रष्टाचार मुक्त होगा.

डॉ. रायजादा कनाडा में क्लीनिक बंद कर आ गए
ये चुनाव किसने लड़ा. इस देश के लोगों ने लड़ा. आप लोगों ने लड़ा. ये अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, प्रशांत भूषण या कुमार विश्वास का चुनाव नहीं था. कुछ नेताओं और पार्टियों को भ्रम था कि वे देश को लूटते रहेंगे औऱ हम बेबस देखते रहेंगे.यहां शहनाज हिंदुस्तानी बैठे हैं, छह महीने से घर नहीं गए. एक डॉक्टर मुनीष रायजादा हैं. कनाडा से अपना क्लीनिक बंद कर आ गए. पूरे देश और विदेश से ढेरों लोग अपनी नौकरी छोड़ आ गए. दो-तीन महीने की छुट्टी लेकर आ गए. इन लोगों को अरविंद या आम आदमी पार्टी से प्यार नहीं था. इन्हें देश बदलने की आशा दिखाई दी. ये उम्मीद लेकर आए हैं दोस्तों. ये बहुत बड़ी बात हुई है. जब लोगों ने कहना चालू कर दिया था कि यहां कुछ नहीं बदल सकता, तब इस आंदोलन ने एक उम्मीद दी है. आप लोगों ने बहुत बडा़ काम किया है. बधाई. आपके परिवारों को भी बधाई. यहां बहुत से वॉलंटियर्स हैं, जिनके बीवी, बच्चों और परिवार वालों ने साथ दिया. कई परिवार वाले ऐसे भी हैं, जिनका बेटा या बेटी जब इस मूवमेंट में आए, तो उन्हें तकलीफ हुई, विरोध भी किया. मगर इन लोगों ने परवाह नहीं की. उन सबको भी बधाई

जब रिक्‍शा चलाने वाले ने दान किए 30 रुपये...
मैं एक महीने से रोड शो कर रहा था. एक दिन इस शो के दौरान एक गरीब आदमी आया. उसने जेब में हाथ डाला और जितने पैसे थे, सब दे दिए. बोला कि मैं रिक्शा चलाता हूं और सुबह से तीस रुपए कमाए हैं. ये मैं आपकी पार्टी को दान देना चाहता हूं. दोस्तों ये चुनाव उस रिक्शेवाले ने लडा़ है. ये विजय बाबा ने लड़ा है, जो रिक्शा चलाते हैं औऱ छह महीने से पार्टी के लिए बिना पैसा लिए रिक्शा चला रहे हैं. और किन लोगों ने लड़ा चुनाव. मंच पर बैठे इन साथियों ने, जिन्हें कोई नहीं जानता. कौन हैं ये लोग. कोई नहीं जानता.राखी बिरला एक छोटी सी लड़की है जिसने कांग्रेस के कैबिनेट मंत्री राजकुमार चौहान को हरा दिया. कोई ये सोच नहीं सकता था कि बीस साल से जीतने वाले को कोई हरा पाएगा.ये वंदना. एक मामूली हाउसवाइफ, इन्होंने 15 साल से विधायक रबींद्र बांसल को हरा दिया. ये सिविल सर्विसेस के मेंस की पढ़ाई छोड़कर आए अखिलेश त्रिपाठी ने एक मंझे नेता को हरा दिया. ये सब आम लोग हैं.

केजरीवाल ने पढ़कर सुनाई मार्मिक चिट्ठी
देश के नेताओं को गुरूर हो गया था कि वे लूटते रहेंगे. ये नहीं पता था कि आम आदमी खड़ा हो गया, तो उनके सिंहासन हिल जाएंगे.अब हमें ये लड़ाई पूरे देश में लेकर जानी है. आपमें बहुत से लोग हैं, जो पहले कांग्रेस और बीजेपी में थे. मगर अब सब अपनी पिछली पार्टियां छोड़कर देश के लिए लड़ रहे हैं. अभी दो मिनट पहले किसी ने बड़ी मार्मिक चिट्ठी दी है मुझे. मैं आपको पढ़कर  सुनाता हूं.
आदरणीय अरविंद जी. मेरा नाम बजरंग अग्रवाल है. मैं रोहिणी का रहने वाला हूं. लॉ ग्रेजुएट हूं और कांग्रेस के लिए कई बरसों से काम करता था. मेरे मन में बोझ है कि अपना कीमती समय ऐसी पार्टी के लिए लगाया, जो करप्शन में डूबी है. जब आपने आंदोलन शुरू किया तो लगता था कि एक अकेला चला भाड़ नहीं फोड़ सकता. पर आज लगता है कि भाड़ ही नहीं फोड़ सकता, उसे चकनाचूर कर सकता है. जब 4 दिसंबर को वोटिंग के बाद मैं घर पहुंचा तो मेरे पांच साल के बेटे ने पूछा, कौन चुनाव जीता. मैंने कहा, बेटा अभी रिजल्ट नहीं आया. वो बड़े उत्साह से बोला कि देखना हमारी झाड़ू जीतेगी. मुझे लगा कि मैंने कहीं गलत तो नहीं कर दिया. मैंने पूछा कि उसे क्या पता है. तो उसने कहा कि मेरे सभी दोस्त कह रहे हैं कि ये झाड़ू वाले देश बदल देंगे, बहुत अच्छे लोग हैं. अगर मेरा बेटा ये नहीं कहता तो शायद मैं ये पत्र नहीं लिखता. अब बोझ कुछ कम हो गया है.

कहीं कल किसी आम आदमी को हमारा घमंड़ तोड़ने को न उठना पड़े
यहां पर हमारे जो विधायक साथी बैठे हैं, उनसे प्रार्थना है, घमंड में मत आ जाना. आज हम लोगों ने बीजेपी और कांग्रेस का अहंकार तोड़ा है, कहीं ऐसा न हो कि कल किसी आम आदमी को खडे़ होकर हमारा अहंकार तोड़ना पड़े. आप लोगों को बड़ी जिम्मेदारी दी है. आपको नेता विधायक नहीं बनना. लोगों की सेवा करना है. मुझे पता चला कि कुछ जगह जश्न मना, पटाखे फोड़े गए. किस चीज का जश्न है. हमारी जीत है क्या. देश के लोगों की जीत है. आपका काम पटाखे फोड़ना नहीं, जनता की सेवा करना है. जरा सा भी घमंड़ न लाना, वर्ना जिस चीज को बदलने चले हैं, उसी का हिस्सा बन जाएंगे.

टॉर्च के चलते नहीं मिला आप को बहुमत

हमें 28 सीट मिली हैं. ऐसा नहीं कि हमें बहुमत नहीं मिल सकता था. मगर आखिरी वक्त विरोधियों ने कई हथकंडे अपनाए. 16 विधानसभाओं में झाड़ू से मिलता चुनाव चिह्न टॉर्च निकाला. ये बिल्कुल झाड़ू जैसा दिखता था. 16 जगह इस चिह्न के साथ निर्दलीय खडे़ किए गए. इन्हें कोई नहीं जानता था. इन्होंने प्रचार नहीं किया. मगर फिर भी इनको चार पांच हजार वोट पड़े. लोग गलतफहमी में उन पर बटन दबाकर आ गए. जैसे कालकाजी में हम 2 हजार वोट से हारे. मगर टॉर्च को 3500 से ज्यादा वोट मिले.
उस दिन साढ़े नौ बजे तक पोलिंग हुई. मगर कुछ चैनलों ने पांच बजे के बाद दिखाना शुरू कर दिया कि बीजेपी को बहुमत मिल रहा है और आम आदमी पार्टी छह सीटों पर सिमट जाएगी.इसके चलते कांग्रेस के खिलाफ गुस्से में भरे लोग बीजेपी को वोट डाल आए इस डर से कि कहीं उनका वोट बर्बाद न हो जाए. मगर ठीक है. ऊपर वाला जो भी करता है, ठीक करता है. हमें 28 सीट मिलीं, इसका ऊपर वाले को शुक्रिया. अब यहां से इस लड़ाई को आगे ले जाएंगे.
पैसे का खूब खेल चला. झुग्गियों में दारू और पैसा बांटा गया. हमें डर लग रहा था कि पैसे दारू लेकर वोट बिक तो नहीं जाएगा. मगर डेटा बता रहा है कि झुग्गीवासियों ने पैसा दारू तो सबसे लिया. मगर वोट झाड़ू पर डाला.उन्हें बधाई. 65 साल से धोखा दे रही पार्टियों को लोगों ने धोखा दिया और इससे वे बौखला गई हैं.

हारने वाले विधायक बौखला गए हैं.
कई जगह से समाचार मिल रहे हैं. एक विधानसभा सीट से समाचार मिला कि अभी तक जो विधायक थे, उनके पास पानी के सभी बूस्टर पंप की चाभी थी. उन्होंने पानी देना बंद कर दिया. एक और विधायक ने कहा कि अब कचरा उठाना बंद. आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता उठा लें अब कूड़ा. मेरी पार्टी के विधायकों से अपील है. चुनाव हारने वालों से अपील है कि जनता के बीच जाएं और काम करें.

4 सीट खरीदना क्‍या मुश्किल था बीजेपी के लिए
चुनाव में 31 सीट बीजेपी को मिली. एक अकाली दल को मिली. हमें 28 सीट मिली. तो सरकार तो बीजेपी को बनानी थी. चार सीट खरीदना क्या मुश्किल था उनके लिए. अभी तक करते आए हैं. मगर वे बोले कि नहीं ऐसा नहीं करेंगे. अच्छी बात है, देर आयद दुरुस्त आयद. मेरा बीजेपी से सवाल है कि अगर उन्हें केंद्र या किसी और राज्य में बहुमत नहीं मिला, तो क्या वह सरकार बनाना बंद कर देंगे. या फिर यह कोरा ढकोसला है.

कांग्रेस-बीजेपी मिलकर बनाएं सरकार
बीजेपी औऱ कांग्रेस एक सी पार्टियां हैं. दोनों करप्शन औऱ दंगा कराती हैं. अब दोनों मिलकर सरकार बना लें, आम आदमी पार्टी विपक्ष में बैठेगी. अगर इन दोनों पार्टियों ने दिल्ली पर चुनाव थोपा तो क्या हम तैयार हैं. हां हम तैयार हैं. दिल्ली के लोग तैयार हैं.
अगले चुनाव में बीजेपी को चुनाव देना वोट बर्बाद करना है.क्योंकि वह जिम्मेदारी से भागते हैं.हम सत्ता भोगने के लिए नहीं आ रहे. अब लडा़ई पूरे देश में ले जानी है. दिल्ली की जनता ने देश को एक दिशा दी है.

जिसको टिकट देना चाह रहे थे, उसके पिता पैरों में गिर गए
एक लड़का है, हम उसे टिकट देने की सोच रहे थे. उसके पिता आए और पैरों में गिर गए. बोले उसे टिकट मत दो. पूरी जिंदगी वह पार्टी की सेवा करेगा, मगर राजनीति गुंडों का काम है. उसे कीचड़ में मत डालो. ये लोगों की सोच थी. मगर अब सोच बदल रही है.अब इस लौ को पूरे देश में ले जाना है.ये काम चंद लोग नहीं कर सकते. हमारी पार्टी वाले नहीं कर सकते. ये आम आदमी पार्टी की लड़ाई नहीं है.ये देश की लड़ाई है. तो मैं इस मंच से आह्वान करना चाहता हूं कि देश के अच्छे लोग, अच्छी राजनीतिक ताकतें, अच्छे आंदोलन इकट्ठे हो जाएं. एक मौका मिला है इस देश को बदलने का. अगर ऐसा हो गया, तो जल्द देश सोने की चिड़िया कहलाएगा.
इस देश के सभी ईमानदार व्यापारी, उद्योगपति आम आदमी पार्टी में आएं.बीजेपी और कांग्रेस के ईमानदार लोग अपनी घुटन छोड़ आजादी की इस लड़ाई में शामिल हों.

सरकार लोकपाल नहीं जोकपाल बिल ला रही है
अन्ना हजारे जी अनशन पर बैठे हैं. सरकार ने आज एक बयान दिया है कि लोकपाल बिल लोकसभा में पारित हो गया. मगर राज्यसभा में बचा हुआ है. दोस्तों लोकसभा में पारित लोकपाल नहीं जोकपाल बिल है. इसे देश की जनता नहीं मानेगी. इससे करप्शन बढ़ेगा. हम अन्ना जी के साथ हैं, तन मन धन से. अन्ना जी की जाग्रति को सलाम करते हैं. कल मैं और कुमार विश्वास अन्ना जी से मिलने रालेगण सिद्धि जा रहे हैं. उन्होंने कहा राजनीतिक पार्टी के लोगों को मंच पर नहीं आने देंगे. हम नहीं जाएंगे और सामने जनता के बीच बैठ जाएंगे.
अंत में साथियों. ये आंदोलन आपके पैसे से चला. हमारे पास तो था नहीं.लेकिन अब लोकसभा का चुनाव लड़ना है. दोबारा दिल्ली का भी चुनाव लड़ना है. अब चंदा चाहिए. आज मैं आह्वान करना चाहता हूं. अपनी वेबसाइट खोल देंगे. देश की जनता से निवेदन है कि दिल खोलकर चंदा दें.अब मेरे पास कई फोन आ रहे हैं. पहले लोग डरते थे कि पता नहीं चार सीट भी आएं. हमने चंदा दिया तो आप वेबसाइट पर नाम डाल देते हो. अब कहते हैं कि डर नहीं, खुलकर चंदा देंगे.
दोस्तों बड़ी शुरुआत हुई है. इतिहास बदला जा रहा है, देश का भविष्य बदला जा रहा है.देश का आम आदमी जाग रहा है. भारत माता की जय

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