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CBI विवाद: पद पर रहेंगे वर्मा-अस्थाना, छुट्टी पर भेजने के खिलाफ SC में सुनवाई

गौरतलब है कि सीवीसी की सिफारिश पर मंगलवार रात सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के सारे अधिकार वापस ले लिए गए और उन्हें छुट्टी पर भेज दिया.

सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा (आगे) और विशेष निदेशक (पीछे) (फाइल फोटो) सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा (आगे) और विशेष निदेशक (पीछे) (फाइल फोटो)

देश की सबसे प्रतिष्ठित जांच एजेंसी सीबीआई में शीर्ष पदों पर फेरबदल के बीच सीबीआई की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि आलोक वर्मा एजेंसी के निदेशक और राकेश अस्थाना विशेष निदेशक के पद पर बने रहेंगे, जबकि एम नागेश्वर राव को अंतरिम प्रभार दिया गया है. वहीं घूसकांड के आरोपों की जांच होने तक वर्मा और अस्थाना के सारे अधिकार ले लिए गए हैं.

सीबीआई के प्रवक्ता ने कहा है कि वर्मा और अस्थाना के सारे अधिकार वापस लेने की केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की सिफारिश को देखते हुए संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को अंतरिम व्यवस्था के तहत निदेशक के कर्तव्यों का निर्वहन करने की जिम्मेदारी दी गई है.

प्रवक्ता ने कहा कि आलोक वर्मा सीबीआई के निदेशक के पद पर और राकेश अस्थाना विशेष निदेशक के पद पर बने रहेंगे. वहीं, आरोप - प्रत्यारोप की सीवीसी द्वारा जांच किए जाने तक अंतरिम अवधि के दौरान दोनों के पास कोई अधिकार नहीं होंगे.

उन्होंने मीडिया में आ रही उन खबरों का खंडन किया है जिसमें यह कहा गया था कि सात फाइलें हटा दी गई हैं. प्रवक्ता ने कहा कि यह झूठी खबर है और इसे निहित स्वार्थ में गढ़ा गया है. प्रवक्ता ने मीडिया सीबीआई में प्रत्येक स्तर पर हर फाइल का रिकॉर्ड रखा जाता है. मीडिया में आ रही इन खबरों का जांच एजेंसी की विश्वसनीयता पर प्रतिकूल असर पड़ेगा.

वर्मा की याचिका पर कल SC में सुनवाई

इस बीच, वर्मा ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और उन्होंने सरकार के फैसले को चुनौती दी. सर्वोच्च न्यायालय उनकी याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करेगा.

इस मसले में सीनियर एडवोकेट और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह का मानना है कि वर्मा की याचिका में ज्यादा दम नहीं दिख रहा है. क्योंकि अव्वल तो सरकार ने ना तो उनको निलंबित किया ना ही बर्खास्त, सिर्फ छुट्टी पर भेजा है.

बिचौलिए मनोज की रिमांड बढ़ी

उधर, दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ दर्ज रिश्वत मामले में गिरफ्तार बिचौलिए मनोज प्रसाद की हिरासत अवधि गुरुवार को पांच दिनों के लिए बढ़ा दी.

सीबीआई ने अदालत से अपील की थी कि उसे मनोज प्रसाद को हिरासत में लेकर पूछताछ करनी है. कोर्ट ने सीबीआई की अपील स्वीकार करते हुए रिमांड की अवधि बढ़ा दी है. बता दें कि सीबीआई ने कारोबारी सतीश साना की लिखित शिकायत पर अस्थाना और पुलिस उपाधीक्षक देवेंद्र कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है. इस मामले में अस्थाना और कुमार के अलावा बिचौलिए मनोज प्रसाद और सोमेश प्रसाद को भी आरोपी बनाया गया है.

सीबीआई ने भी कोर्ट से 5 दिन की कस्टडी बढ़ाने के लिए अर्जी लगाई थी. सीबीआई ने मनोज को 17 अक्टूबर को राकेश अस्थाना केस में गिरफ्तार किया था. मनोज प्रसाद पिछले 7 दिन से सीबीआई की ही कस्टडी में है.

सीबीआई ने कोर्ट में कहा कि मनोज ने 3 करोड़ रुपए की लेने की बात तो स्वीकार की है, लेकिन वह सीबीआई में किसी भी अधिकारी को नहीं जानता है.

इससे पहले गुरुवार को दोपहर 2 बजे दुबई के व्यापारी मनोज प्रसाद को सीबीआई ने पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया. सुनवाई के दौरान मनोज प्रसाद को पेश करके सीबीआई ने कोर्ट से कहा कि जो मोबाइल नंबर मनोज ने उन्हें दिया था वो स्विच ऑफ था, लिहाजा अभी भी फोन का डाटा रिकवर करना बाकी है.

कोर्ट ने सीबीआई से पूछा, क्या आरोपी ने 3 करोड़ लेने और देने की बात स्वीकार किया है. क्या आपने बैंक अकाउंट चेक किया. क्या सीबीआई के पास 3 करोड़ का बैंक का स्टेटमेंट है. इस पर सीबीआई ने कहा कि आरोपी ने पैसा कैश लिया था. कोर्ट ने कहा कि आरोपी बोल रहा है कि जो पैसा उसने लिया वो उसका बिजनेस का हिस्सा है.

वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा आरोपी मनोज के तरफ से पेश हुए.उन्होंने कहा कि हाथियों की लड़ाई में (दो सीबीआई के अधिकारियों) छोटे जानवर को कुचला जा रहा है. सीबीआई का यह कहना गलत है कि मोबाइल नंबर इनके पास नहीं था, ये सभी पासवर्ड लेकर मोबाइल का पूरा डाटा ले चुके है. राकेश अस्थाना के मामले में मेरे क्लाइंट को गिरफ्तार किया गया है और राकेश अस्थाना को पहले ही हाई कोर्ट से राहत मिल चुकी है.ऐसे में मनोज की सीबीआई कस्टडी की क्या जरूरत है.

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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