उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बीते साल निम्न आय वर्ग के परिवारों के बच्चों की मदद की योजना के तहत मुफ्त यूनिफॉर्म, किताबें, बस्ते और जूते बांटे थे. हर छात्र को दी गई सामग्री पर सरकार को 2,558 रुपए का खर्च आया. उत्तर प्रदेश प्रशासन के इस कदम को पूरे देश में प्रशंसा मिली. अब जरा इसकी तुलना विदेश मंत्रालय की ओर से योगा कॉफी-टेबल बुक्स के प्रकाशन पर सालाना किए जाने वाले खर्च से की जाए.
बता दें कि कॉफी-टेबल बुक्स कोई साहित्यिक, शैक्षिक या बुद्धिजीवी उद्देश्यों को पूरा करने के लिए नहीं छापी जाती हैं. ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में दी गई परिभाषा के मुताबिक ‘कॉफी-टेबल बुक ऐसी एक बड़ी, महंगी और खूब सारे चित्रों से सज्जित किताब को कहा जाता है जो अनौपचारिक पाठन के लिए होती है.’
सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत इंडिया टुडे की याचिका के जवाब में विदेश मंत्रालय ने बताया कि बीते तीन साल में विदेश मंत्रालय ने योगा कॉफी-टेबल बुक्स के प्रकाशन पर 40 लाख रुपए खर्च किए हैं.
योगा कॉफी-टेबल बुक्स के प्रकाशन पर बीते तीन साल में हुआ खर्च
2017 में ‘विश्व शांति के लिए योग’ के शीर्षक से प्रकाशित की गई इन कॉफी-टेबल बुक्स पर विदेश मंत्रालय ने 13.50 लाख रुपए खर्च किए. स्कूलों में मुफ्त आपूर्ति के आदित्यनाथ मॉडल से तुलना की जाए तो विदेश मंत्रालय ने 2017 संस्करण के लिए योगा बुक्स पर जो खर्च किया उससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के 527 बच्चों का सालाना शिक्षा बजट पूरा किया जा सकता था.

आरटीआई से मिले जवाब में आगे बताया गया है कि 2016 में मंत्रालय की ओर से प्रकाशित ‘द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय योगा दिवस’ की 1,000 प्रतियों पर 3 लाख रुपए खर्च किए गए. इसके एक साल बाद ही यानि 2017 में 13.50 लाख रुपए खर्च किए गए. लेकिन विदेश मंत्रालय का ऑर्डर सबसे बड़ा 2015 में था जब संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था. तब विदेश मंत्रालय ने ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ नाम से 3,000 कॉफी-टेबल बुक्स प्रकाशित की थीं, जिन पर 23.31 लाख रुपए खर्च आया था. मूल संस्करण की एक प्रति 777 रुपए की बैठी थी.