मैसूर राजघराने और वहां के लोगों के लिए गुरुवार का दिन बेहद खास है. उन्हें नया राजा मिल गया है. 23 साल के यदुवीर वडियार का गुरुवार को राजतिलक हुआ.
यदुवीर अमेरिका में पढ़ाई करके लौटे हैं. यह एक निजी समारोह था जिसमें राजपरिवार के सदस्यों के साथ-साथ पुरोहित और महल से जुड़े कर्मचारी ही शरीक हुए. जानकारी के मुताबिक इस शाही परिवार में करीब 1200 लोग शामिल हुए.
अमेरिका के पूर्वी किनारे पर स्थित एक यूनिवर्सिटी से लेकर अंबा विलास पैलेस मैसूर में राज्याभिषेक तक, 23 साल के यदुवीर का सफर बेहद दिलचस्प है. वाडियार राजवंश ने साल 1399 में मैसूर में शासन संभाला था जो अब 2015 तक जारी है. भारत अब लोकतांत्रिक देश है और राजवंश का राजतिलक एक निजी कार्यक्रम माना जाता है.
इस साल मैसूर दशहरा की अगुवाई यदुवीर करेंगे और साथ-साथ कर्नाटक सरकार के साथ लंबे समय से चल रहे राजपरिवार की संपत्ति विवाद की कानूनी लड़ाई भी उनकी ही देख रेख में होगी. यदुवीर मैसूर राजघराने के दिवंगत वारिस श्रीकांतादत्ता नरसिम्हा राजा वाडियार की बड़ी बहन गायत्री देवी के पोते हैं. यदुवीर का कहना है कि वह भारत में टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए काम करना चाहते हैं. मैसूर राजवंश में पिछला राजतिलक 1974 में उनके चाचा श्रीकांतदत्ता नरसिम्हराजा वाडियार का हुआ था, जिनकी 2013 में मौत हो गई थी.
अब शासन चलाने में भले ही राजवंशों की कोई भूमिका न बची हो, लेकिन अब भी मैसूरवासी महल में होने वाली गतिविधियों पर चाव से नजर रखते हैं.