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UP में गोवध पर 10 साल की सजा और 5 लाख जुर्माना, जानिए अन्य राज्यों में क्या है कानून?

उत्तर प्रदेश में गोवध करने वालों पर 10 साल की जेल और 5 लाख जुर्माना लगाने की तैयारी चल रही है. वहीं अंग भंग करने पर 7 साल की जेल और 3 लाख तक जुर्माना लगेगा. ऐसे मामले में दूसरी बार पकड़े जाने पर गैंगस्टर एक्ट लगेगा. ऐसे में अन्य राज्यों की स्थिति पर भी नजर डालते हैं.

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यूपी में योगी सरकार गोवध को लेकर कानून में संशोधन करने जा रही है (फाइल)
यूपी में योगी सरकार गोवध को लेकर कानून में संशोधन करने जा रही है (फाइल)

  • यूपी सरकार ला रही गोवध निवारण संशोधन अध्यादेश
  • यूपी में गोवध पर रोक के लिए नियम बनाने की कोशिश
  • 28 में से 20 राज्यों में गोवध पर रोक के लिए हैं कानून

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार गोवध रोकने को लेकर कड़े सजा का प्रावधान करने की तैयारी में है और गोवध निवारण संशोधन अध्यादेश लाई है. गोवध का यह अध्यादेश मंगलवार को कैबिनेट ने पास कर दिया जो 2 से 3 दिन में लागू हो जाएगा. यूपी सरकार की ओर से गोवध पर रोक के लिए नियम बनाने की कोशिश की जा रही है. जानते हैं कि देश के अन्य राज्यों में किस तरह के प्रावधान हैं.

उत्तर प्रदेश में गोवध करने वालों पर 10 साल की जेल और 5 लाख जुर्माना लगाने की तैयारी चल रही है. वहीं अंग भंग करने पर 7 साल की जेल और 3 लाख तक जुर्माना लगेगा. ऐसे मामले में दूसरी बार पकड़े जाने पर गैंगस्टर एक्ट लगेगा.

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कल मंगलवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास पर कैबिनेट की बैठक हुई जिसमें उत्तर प्रदेश गो-वध निवारण (संशोधन) अध्यादेश, 2020 के प्रारूप को स्वीकृति प्रदान की गई.

इसे भी पढ़ें --- UP में गोवध पर 10 साल की सजा, 5 लाख का जुर्माना, कैबिनेट की अध्यादेश को मंजूरी

20 राज्यों में गोवध पर रोक

देश के 28 राज्यों में से 20 राज्यों में गोवध पर रोक के लिए कानून बने हुए हैं जबकि शेष अन्य 8 राज्यों (बंगाल, केरल, असम, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मेघालय, नागालैंड और त्रिपुरा) गोवध पर बैन नहीं है और यहां पर बीफ कानूनी तौर पर सर्वत्र मिलता है.

साथ ही गोवध से जुड़े मामले पर कोई केंद्रीय कानून की व्यवस्था नहीं है लेकिन ज्यादातर राज्यों में अलग-अलग स्तर की रोक लंबे समय से लागू है. आइए, जानते हैं कि किन राज्यों में गौवध को लेकर क्या नियम तय किए गए हैं और कहां इसके वध की अनुमति है.

आंध्र प्रदेश (THE ANDHRA PRADESH PROHIBITION OF COW SLAUGHTER AND ANIMAL PRESERVATION ACT, 1977)

गोवध पर प्रतिबंध, लेकिन बैल के वध की अनुमति है. हालांकि बैल के वध के लिए अनुमति लेनी होगी. वध की अनुमति तभी मिलेगी जब वह पशु किफायती नहीं हो या प्रजनन या फिर कृषि कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं लग रहा हो.

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अधिकतम 6 महीने तक कारावास या 1,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों.

असम (ASSAM CATTLE PRESERVATION ACT, 1950)

वध पर आंशिक रूप से प्रतिबंध. 14 साल के ऊपर के सभी मवेशियों के वध की अनुमति, लेकिन वध के लिए यह अनुमति लेनी होगी कि पशु 14 साल से अधिक उम्र का है और चोट, विकृति या किसी लाइलाज बीमारी के कारण स्थायी रूप से काम करने या प्रजनन के लिए अक्षम हो गया है.

अधिकतम 6 महीने तक कारावास या 1,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों.

बिहार (BIHAR PRESERVATION AND IMPROVEMENT OF ANIMALS ACT, 1955)

गाय और बछड़े का वध पूरी तरह से प्रतिबंधित है. लेकिन 15 साल से अधिक उम्र के बैल या सांड का वध तभी हो सकता है जब वह चोट, विकृति या किसी असाध्य रोग के कारण स्थायी रूप से काम करने या प्रजनन के लिए अक्षम हो गया हो.

अधिकतम 6 महीने तक कारावास या 1,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों.

गोवा (THE GOA, DAMAN & DIU PREVENTION OF COW SLAUGHTER ACT, 1978)

गाय के वध पर पूर्ण प्रतिबंध, लेकिन अगर असहनीय दर्द हो या संक्रामक बीमारी हो या चिकित्सा अनुसंधान के लिए चाहिए तो उसका वध किया जा सकता है.

राज्य में किसी भी रूप में गोमांस या गोमांस उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध.

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2 साल तक की कैद या 1,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों.

गुजरात (THE BOMBAY ANIMAL PRESERVATION ACT, 1954 (गुजरात में भी मान्य)

गाय, बछड़े, बैल या सांड का वध पूरी तरह से निषिद्ध है. हालांकि कुछ शर्तों पर भैंस के वध की अनुमति दी गई.

अधिकतम 6 महीने तक कारावास या 1,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों.

पंजाब (THE PUNJAB PROHIBITION OF COW SLAUGHTER ACT, 1955)

गाय (और उसकी संतान) का वध पूरी तरह से निषिद्ध है. वध के लिए निर्यात की भी अनुमति नहीं है. राज्य में गोमांस की बिक्री पर प्रतिबंध है.

अधिकतम 2 साल तक की कैद या 1,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों.

हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में भी THE PUNJAB PROHIBITION OF COW SLAUGHTER ACT, 1955 के प्रावधान लागू होते हैं, लेकिन

हरियाणा में विशेष परिस्थितियों में 5 साल तक का कठोर कारावास या 5,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों है.

कर्नाटक (THE KARNATAKA PREVENTION OF COW SLAUGHTER AND CATTLE PRESERVATION ACT, 1964 )

गाय, गाय का बछड़ा या बछिया के वध पर पूरी तरह से रोक है. सांड, बैल और व्यस्क भैंसों के वध की अनुमति लेनी होगी. अनुमति तभी मिलेगी जब ये जानवर 12 वर्ष से अधिक उम्र के हो गए हों या स्थायी रूप से चोट, विकृति या किसी अन्य कारण से प्रजनन, या दूध देने में अक्षम हो गए हों.

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राज्य से बाहर किसी स्थान पर वध के लिए परिवहन की अनुमति नहीं है.

वध के लिए गाय या बछड़े की बिक्री की भी अनुमति नहीं है.

अधिकतम 6 महीने तक कारावास या 1,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों.

केरल

केरल में राज्य स्तर पर कोई कानून नहीं है, लेकिन जानवरों के वध के मामले में पंचायत अधिनियम/नियम लागू होते हैं. केरल पंचायत (स्लॉटर हाउस और मीट स्टॉल) नियम, 1964 के तहत पंचायत कानून राज्य में पंचायती (गैर-नगरपालिका) क्षेत्रों में उपयोगी जानवरों के वध को प्रतिबंधित करते हैं. केरल पंचायत (स्लॉटर हाउस और मीट स्टॉल) नियम, 1964 के अनुसार बैल, सांड, गाय का बछड़ा, या भैंस के बछड़ा को नियम 8 के तहत मारने के लिए तब तक कोई प्रमाण पत्र नहीं दिया जाएगा, जब तक कि जानवर 10 साल के अधिक आयु का न हो, प्रजनन के लिए अयोग्य हो गया हो या फिर चोट या विकृति के कारण स्थायी रूप से काम करने में अक्षम हो गया हो. 1976 में, केरल सरकार ने एक आदेश जारी कर सभी नगरपालिका क्षेत्रों में उपयोगी जानवरों के वध पर प्रतिबंध लगा दिया.

मध्य प्रदेश (MADHYA PRADESH AGRICULTURAL CATTLE PRESERVATION ACT, 1959)

गाय, बछड़ा, बैल, सांड और भैंस के बछड़े का वध पूरी तरह से प्रतिबंधित है.

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3 साल तक की कैद और 5000 रुपये का जुर्माना. हालांकि आम तौर पर कारावास 6 महीने से कम नहीं होगा और जुर्माना 1,000 रुपये से कम नहीं होगा.

महाराष्ट्र (THE MAHARASHTRA ANIMAL PRESERVATION ACT, 1976)

गाय का वध पूरी तरह से प्रतिबंधित है.

अधिकतम 6 महीने तक कारावास और 1,000 रुपये तक का जुर्माना.

ओडिशा (THE ORISSA PREVENTION OF COW SLAUGHTER ACT, 1960)

गाय का वध पूरी तरह से प्रतिबंधित है.

अधिकतम 2 साल तक की कैद या 1,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों.

राजस्थान (THE RAJASTHAN BOVINE ANIMAL (PROHIBITION OF SLAUGHTER AND REGULATION OF TEMPORARY MIGRATION OR EXPORT) ACT, 1995)

गाय समेत सभी गोजातीय जानवरों के वध पर प्रतिबंध है. राज्य में बीफ की बिक्री, ट्रांसपोर्ट और उत्पादन सभी पर रोक है.

1 साल से लेकर अधिकतम 2 साल तक की कैद या 10,000 रुपये तक का जुर्माना.

तमिलनाडु (TAMIL NADU ANIMAL PRESERVATION ACT, 1958)

राज्य में शुरुआती प्रावधान के अनुसार, सभी जानवरों का वध किया जा सकता था, लेकिन 30 अगस्त 1976 को राज्य सरकार ने पूरे राज्य में गोवध पर प्रतिबंध लगा दिया.

हालांकि अन्य जानवरों के वध से पहले 'फिट-फॉर-स्लॉटर' प्रमाणपत्र के जरिए अनुमति हासिल करनी होगी. हालांकि वध की अनुमति उन्हीं जानवरों को मिलेगी जिनकी उम्र 10 साल से ज्यादा हो गई हो या फिर स्थायी रूप से चोट, विकृति या किसी अन्य कारण से प्रजनन, या दूध देने में अक्षम हो गए हों.

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3 साल तक की कैद या 1,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों.

पश्चिम बंगाल (THE WEST BENGAL ANIMAL SLAUGHTER ACT, 1950)

राज्य में सभी जानवरों का वध किया जा सकता है, लेकिन उससे पहले 'फिट-फॉर-स्लॉटर' प्रमाणपत्र के जरिए अनुमति हासिल करनी होगी. हालांकि वध की अनुमति उन्हीं जानवरों को मिलेगी जिनकी उम्र 14 साल से ज्यादा हो गई हो या फिर स्थायी रूप से चोट, विकृति या किसी अन्य कारण से प्रजनन, या दूध देने में अक्षम हो गए हों.

6 माह तक की कैद या 1,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों. स्रोत

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