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'शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती हिंदू धर्म को बर्बादी की ओर धकेल रहे हैं', बोले पायलट बाबा

पायलट बाबा ने कहा, 'शंकराचार्य हिंदू धर्म को बर्बाद करने पर तुले हुए हैं. नागा साधुओं को स्वरूपानंद की तानाशाही को भाव नहीं देना चाहिए.' गौरतलब है कि स्वरूपानंद ने नागा साधुओं से प्रयाग और हरिद्वार में इकट्ठा होने की बात कही थी, ताकि साईं भक्तों के खिलाफ युद्ध छेड़ा जा सके.

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द्वारापीठ शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती लगातार कह रहे हैं कि हिंदू साईं की आराधना ना करें. लेकिन जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर पायलट बाबा ने शंकराचार्य पर चरमपंथ को बढ़ावा देने का आरोप मढ़ दिया है.

पायलट बाबा ने कहा, 'शंकराचार्य हिंदू धर्म को बर्बाद करने पर तुले हुए हैं. नागा साधुओं को स्वरुपानंद की तानाशाही को भाव नहीं देना चाहिए.' गौरतलब है कि स्वरूपानंद ने नागा साधुओं से प्रयाग और हरिद्वार में इकट्ठा होने की बात कही थी, ताकि साईं भक्तों के खिलाफ युद्ध छेड़ा जा सके.

पायलट बाबा ने कहा, 'साईं भक्तों के खिलाफ जिस तरह से युद्ध छेड़ने की बात शंकराचार्य कर रहे हैं वो खतरे की घंटी है. मुझे समझ नहीं आता कि वे अपने निजी अहंकार के लिए नागा साधुओं का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं?. शंकराचार्य हिंदू धर्म को बर्बादी की ओर धकेल रहे हैं.'

उन्होंने कहा, 'शंकराचार्य आएंगे और जाएंगे, लेकिन आस्था बरकरार रहेगी. धर्म निजी मामला है. कोई भी व्यक्ति किसी की आस्था में हस्तक्षेप नहीं कर सकता. यह एक तरीके की हिंसा होगी, अगर हम साईं के भक्तों को आराधना करने से रोकते है. हमें ये पता होना चाहिए कि किसी की आस्था पर तानाशाही लागू करने का अधिकार हमें नहीं है.'

गौरतलब है कि संन्यास लेने से पहले पायलट बाबा स्वयं प्रोफेशनल पायलट थे. उन्होंने कहा, 'हरिद्वार और प्रयाग में नागा साधुओं से इकट्ठा होने की बात कहकर शंकराचार्य चरमपंथ को बढ़ावा दे रहे हैं.'

इस बीच वाराणसी में स्वरुपानंद ने एक बार फिर दोहराया कि हिंदू साईं को देवता ना माने. स्वरुपानंद के चेलों ने शंकराचार्य की आरती उतारी और इस बात की शपथ ली कि मंदिरों से साईं की प्रतिमा को हटा देंगे. इसके साथ ही स्वरुपानंद के शिष्यों ने लहुराबीर में उस स्थान को भी धोया, जहां साईं भक्तों ने 24 जून को शंकराचार्य का पुतला दहन किया था.

साईं के अनुयायियों में शंकराचार्य को लेकर काफी रोष है. गौरतलब है कि शंकराचार्य ने साईं को मुस्लिम करार देते हुए कहा था कि हिंदू उनकी पूजा ना करें.

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