तेलंगाना के मुख्यमंत्री और तेलंगाना राष्ट्र समिति के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ 80 हजार करोड़ के कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना (KLIP) का उद्घाटन किया. इस दौरान आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मौजूद रहे, लेकिन केसीआर के भतीजे और पूर्व सिंचाई मंत्री हरीश राव गैरहाजिर रहे. इसके बाद से केसीआर और उनके परिवार में दरार पड़ने की अटकलें लगाई जा रही हैं.
कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना दुनिया की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना है. परियोजना के तहत गोदावरी नदी का 283 हजार मिलियन क्यूबिक पानी सिंचाई और पीने के इस्तेमाल में लाया जा सकेगा. इससे तेलंगाना के 13 जिलों को सिंचाई और पीने का पानी उपलब्ध हो सकेगा. इस प्रोजेक्ट की शुरुआत तीन साल पहले यानी साल 2016 में हुई थी.
हरीश राव ने कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना के कार्यान्वयन में अहम भूमिका निभाई है. ऐसे में हरीश राव की गैरमौजूदगी की राजनीतिक गलियारे में जोरशोर से चर्चा हो रही है. वह जयशंकर भूपलपल्ली जिले में आयोजित लंच में भी नहीं उपस्थित रहे. आपको बता दें कि हरीश राव टीआरएस के प्रमुख केसीआर के भतीजे हैं. उन्होंने तेलंगाना राज्य की मांग को लेकर चलाए गए आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी.
केसीआर के भतीजे हरीश राव
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि केसीआर अपने बेटे केटी रामाराव को आगे लाना चाहते हैं और अपनी राजनीतिक विरासत व पार्टी का उत्तराधिकारी बनाना चाहते हैं. इसी के चलते वो अपने भतीजे हरीश राव को दरकिनार करना चाहते हैं. इससे पहले केटी रामाराव को पार्टी का कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया जा चुका है, जबकि विधानसभा चुनाव में हरीश राव को कोई तवज्जों नहीं दिया गया.
आपको बता दें कि पिछले साल दिसंबर में तेलंगाना में विधानसभा चुनाव हुए थे, जिसमें टीआरएस को शानदार जीत हासिल हुई थी. टीआरएस के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि केसीआर के कालेश्वरम प्रोजेक्ट के लिए हरीश राव ने दिन रात एक कर दिया था. हरीश राव ने ही जमीनी पर इसके कार्यान्वयन के लिए काम किया.
फिलहाल हरीश राव सिद्दीपेत से विधायक हैं. जब केसीआर दुनिया की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना का उद्घाटन कर रहे थे, तब वो अपने जिले में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे. हालांकि बाद में उन्होंने अपने गृह क्षेत्र में कालेश्वरम प्रोजेक्ट को लेकर आयोजित समारोह में हिस्सा लिया. आपको बता दें कि यह परियोजना मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमईआईएल) और BHEL के सहयोग से 80 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई है.