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39 भारतीयों के सवाल पर सुषमा बोलीं- वो जिंदा हैं कि मारे गए, हमारे पास कोई सबूत नहीं हैं

इराक के मोसुल शहर से आईएसआईएस द्वारा अगवा किए 39 भारतीय कहां हैं? इस मुद्दे पर देश की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने राज्यसभा में बयान दिया.

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राज्यसभा में बयान देती हुईं सुषमा स्वराज
राज्यसभा में बयान देती हुईं सुषमा स्वराज

इराक के मोसुल शहर से आईएसआईएस द्वारा अगवा किए 39 भारतीय कहां हैं? इस मुद्दे पर देश की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने राज्यसभा में बयान दिया.

विपक्ष के सवालों पर जवाब देते हुए सुषमा स्वराज ने कहा कि ये ना कहें कि वे लोग मार दिए गए हैं. ये कहें कि लोगों के मारे जाने की खबर है. पर तथ्य मेरे पास हैं. अभी भी तलाश जारी है. मेरे पास कोई ठोस सबूत नहीं है, ना ही उनके जिंदा होने के और ना ही उनके मारे जाने के. क्योंकि हमारे सूत्रों ने बताया है कि वो लोग जिंदा हैं. अगवा किए गए भारतीयों से कोई सीधा संपर्क तो नहीं है, पर इन सूत्रों के जरिए जानकारी मिल रही है. हमारी सरकार ने उन्हें तलाशने के लिए दिन-रात एक कर दिए हैं.

सुषमा स्वराज का बयान...
सार्क सम्मलेन से लौटने के बाद मैंने देखा कि एक समाचार चैनल पर 39 भारतीय कहां हैं? नाम से एक रिपोर्ट दिखाई जा रही है. मैं बता दूं कि यही स्टोरी पिछले पांच महीने में 10 बार दिखाई गई है. कुछ अखबारों ने इस दौरान छापा भी. मैं इस दौरान अगवा किए गए भारतीय के परिवार के सदस्यों से मिली हुईं हूं, वो भी कम से कम 5 बार. भारतीय नागरिक मारे गए, ऐसा दावा करने का सिर्फ एक मात्र सोर्स है...वो है हरजीत. ये वो व्यक्ित है जो वहां से निकल भागा. वह पहले दिन से यही दावा कर रहा है कि उसके साथियों को आईएसआईएस के आतंकियों ने गोली मार दी. उसकी कहानी में बहुत विरोधाभास है. इस कहानी के सामने आने के बाद हमारे पास दो विकल्प थे. या तो इसे पूरी तरह से सच मान लिया जाए और सभी अगवा लोगों को मृत घोषित कर दिया जाए. और तलाश बंद कर दें. दूसरा विकल्प ये था कि विरोधाभासों के चलते उसकी बातों पर विश्वास ना करें और तलाश जारी रखें. बुद्धिमता का भी यही तकाजा था कि उसके बयान को अस्वीकार करते हुए तलाश करते रहें. आज मैं फिर से कह रही हूं कि इन अगवा लोगों को तलाशने के लिए हमनें हर उस देश से संपर्क साधा जिनसे मदद की उम्मीद की जा सकती थी. सिर्फ विदेश मंत्रियों से ही नहीं कई राष्ट्राध्यक्षों से भी बात की. हर उस संस्था या वयक्ति से संपर्क साधा जिससे मदद मिलने की संभावना था. ऐसा करने से एक फायदा हुआ कि हमें 6 ऐसे सूत्र मिले, जिन्होंने बताया कि भारतीय मारे नहीं गए. ये संदेश मौखिक नहीं हैं, बल्कि लिखित मिले हैं. क्योंकि ये संदेश गोपनीय हैं इसलिए सबको नहीं दिखा सकती. हमारी सरकार ने अगवा लोगों का पता लगाने के लिए एक अलग अधिकारी इराक भेजा था. रेड क्रिसेंट ने भी अगवा लोगों के जिंदा होने का संदेश दिया था. हमारी सरकार बेहद ही विषम परिस्थितियों में काम कर रही है. हमारे पास हर रोज संदेश आ रहे हैं. कम से कम 6 जगह से जानकारी मिली है कि वो मारे नहीं गए. हम आज भी ठोस सबूत के इंतजार में हैं. हमारा उनसे कोई सीधा संपर्क नहीं है. ये बात मैंने पहले भी कही है. बस हम इतना कह सकते हैं कि वो जिंदा हैं कि फिर मारे गए, हमारे पास इसके कोई सबूत नहीं हैं.

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इस मीडिया रिपोर्ट पर मचा बवाल
एक निजी टीवी चैनल ने जानकारी दी कि उन्हें दो बांग्लादेशी मजदूरों ने बताया है कि आतंकियों ने जून के महीने में जिन 40 लोगों को अगवा किया था उसमें से 39 को गोली मार दी गई. इसमें एक मात्र शख्स भागने में कामयाब रहा.

दरअसल, न्यूज चैनल के रिपोर्टर की मुलाकात कुर्दिस्तान की राजधानी इरबिल में शफी और हसन से हुई, जो उस बांग्लादेशी ग्रुप का हिस्सा थे जिन्हें आईएस के आतंकियों ने मोसुल से अगवा कर लिया था. यहीं से 40 भारतीय भी अगवा किए गए थे.

किडनैप करने के बाद पहले आतंकियों ने हर किसी से उनके धर्म के बारे में पूछा. बाद में भरोसा दिलाया कि उन्हें इरबिल ले जाया जाएगा. एक पल के लिए भारतीयों को ऐसा लगने लगा कि वे आतंकियों के चंगुल से बच जाएंगे. पर ऐसा नहीं हुआ. बाद में आतंकियों ने बांग्लादेशी और भारतीय नागरिकों को अलग-अलग कर दिया गया.

कुछ दिनों बाद आतंकियों की चंगुल से बच निकलने वाले हरजीत की मुलाकात बांग्लादेशी मजदूरों से हुई. उसने बताया कि अगवा भारतीयों को आतंकी एक पहाड़ी इलाके में ले गए. 15 जून की बात है कि उसके साथियों को आतंकियों ने गोली मार दी. आतंकियों ने तो उस पर भी गोली चलाई थी, पर वह उसे छू कर निकल गई. उसने आतंकियों के सामने मरने का नाटक किया जिस कारण से वह बच पाया.

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