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मॉब लिंचिंग पर SC सख्त, कहा- कानून हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं

पिछले कुछ दिनों में उत्तर प्रदेश, झारखंड समेत देश के कई राज्यों में मॉब लिंचिंग की घटनाएं हुई हैं. इन घटनाओं की वजह से विपक्षी पार्टियां केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साध रही हैं.

सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

बीते दिनों देश के कई हिस्सों में हुई मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि लिंचिंग को लेकर कानून बनाने के लिए ग्रुप ऑफ मिनिस्टर का गठन किया जा चुका है.

इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 9 राज्य सरकारों ने अनुपालन रिपोर्ट (सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने की रिपोर्ट) को दाखिल कर दिया है. SC ने कहा कि अन्य राज्य सरकारें एक हफ्ते के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करें. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए  कहा कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता है, तो उनके होम सेक्रेटरी को समन किया जाएगा. अब अगले हफ्ते इस मामले पर कोर्ट फिर सुनवाई करेगा.

उत्तर प्रदेश सरकार ने भी दिया जवाब

मॉब लिंचिंग मामले में उत्तर प्रदेश की सरकार ने कोर्ट को बताया कि उनकी सरकार ने 17 जुलाई 2018 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अनुपालन किया है. मॉब लिंचिंग की घटना को रोकने के लिए सभी जिलों के SP को नोडल ऑफिसर बनाया गया है.

यूपी सरकार की ओर से कहा गया है कि नोडल ऑफिसर टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जो उन लोगों पर नजर रखेगी जो हिंसा को भड़काते हैं या अफ़वाह के जरिए माहौल बनाने की कोशिश करते हैं.

उनके मुताबिक नोडल ऑफिसर लोकल इंटेलिजेंस यूनिट के साथ हर महीने में कम से एक बार मीटिंग करेगा. नेशनल हाई-वे पर पुलिस की पेट्रोलिंग शुरू की जा चुकी है. उन इलाकों में भी पेट्रोलिंग की जा रही है जहां लिंचिंग की घटनाएं हुई हैं.

कोर्ट को सरकार के द्वारा बताया गया है कि अगर कोई लिंचिंग की घटना में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ FIR दर्ज की जाएगी और कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जाएगी. इसके अलावा पीड़ित परिवार को पुलिस पूरी सुरक्षा मुहैया कराएगी.

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