scorecardresearch
 

संजय दत्त को राहत, मिली 4 हफ्ते की मोहलत

बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है.  सु्प्रीम कोर्ट ने संजय दत्त को सरेंडर करने के लिए चार हफ्ते की मोहलत दी है.

साल 1993 के मुंबई ब्‍लास्‍ट मामले में आर्म्‍स एक्‍ट के तहत दोषी पाए गए बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है.  कोर्ट ने संजू बाबा को सरेंडर करने के लिए चार हफ्ते की मोहलत दी है. हालांकि इससे पहले कोर्ट ने मंगलवार को जैबुन्निसा अनवर काजी की अर्जी को खारिज कर दिया था.

गौरतलब है कि 1993 मुंबई बम ब्लास्ट के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने संजय दत्त को आर्म्स एक्ट के तहत पांच साल की सजा सुनाई थी. उन्‍हें 18 अप्रैल तक सरेंडर करना था. जैबुन्निसा ने भी संजय की तरह अपनी अर्जी में सरेंडर करने के लिए मोहलत मांगी थी.

सरेंडर की मियाद बढ़ाने के लिए सोमवार को संजय दत्त ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी. उन्होंने व्यावसायिक कारणों का हवाला देते हुए सरेंडर करने के लिए 6 महीने का और वक्त मांगा था.

संजय दत्त की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में बड़ी राहत की गुंजाइश नहीं है हालांकि आप अपने व्यवसायिक जिम्मेदारियों को खत्म कर लें इसके लिए आपको चार हफ्ते की मोहलत दी जा सकती है.

इसके साथ सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि आगे उन्हें कोई और मोहलत नहीं मिलेगी. न्यायमूर्ति पी. सदाशिवम की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस याचिका की सुनवाई करते हुए मानवीय आधार पर यह फैसला दिया.

जैबुन्निसा सहित तीन दोषियों की अर्जी हुई थी खारिज
गौर करने वाली बात है कि 1993 मुंबई बम ब्लास्ट के मामले में तीन दोषियों की ऐसी ही अर्जी को सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को खारिज कर दिया था. जैबुन्निसा अनवर काजी, इशहाक मोहम्मद और शहरीफ अब्दुल की अर्जी खारिज हुई थी. तीनों ही दोषियों को आर्म्स एक्ट के तहत पांच साल की सजा हुई है.

गौरतलब है कि मुंबई विस्फोट मामले में ही सजा पाने वाली जैबुन्निसा अनवर काजी, इशहाक मोहम्मद और शहरीफ अब्दुल ने राष्ट्रपति द्वारा उनकी क्षमायाचना पर निर्णय ले लेने तक अपनी सजा पर रोक लगाने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की थी.

जैबुन्निसा ने अपनी उम्र का हवाला देते हुए कोर्ट से राहत की गुहार लगाई थी. 70 साल की जैबुन्निसा किडनी के कैंसर से पीड़ित हैं, उसका इलाज चल रहा है. जैबुन्निसा ने अपनी याचिका में कहा था कि उसे ना केवल लगातार डॉक्‍टरों की देखरेख में रहने की जरूरत है, बल्कि हमेशा एक देखभाल करनेवाला भी चाहिए. उसने कहा था कि इस हालत में जेल में रहते हुए वह बच नहीं पाएगी.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें