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बच्चा गोद लेने वाले विदेशियों के लिए बने नई गाइडलाइंस: सुप्रीम कोर्ट

विदेशियों द्वारा बच्चे गोद लेने और फिर उनसे गैर-कानूनी काम कराने को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स एजेंसी को निर्देश जारी किया है, कि वो इसे लेकर नई गाइडलाइंस तैयार करें. 3 महीने के अंदर गाइडलाइंस तैयार करना का निर्देश दिया गया है.

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3 महीने में गाइडलाइंस तैयार करने का निर्देश
3 महीने में गाइडलाइंस तैयार करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स एजेंसी (सीएआरए) को निर्देश दिए हैं कि वो 3 महीने के अंदर विदेशियों द्वारा बच्चा गोद लेने के मामले में गाइडलाइंस तैयार करे. एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ये निर्देश दिया है.

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि सीएआरए जो भी गाइडलाइंस तय करेगी, उसका पूरे देश में तमाम राज्य सरकारें और केंद्र पालन करेंगी. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा है कि वो इंटर-कंट्री और इंट्रा-कंट्री एडॉप्शन मामले में नियम तय करे.

विदेशियों के लिए सख्त नहीं हैं कानून
एक एनजीओ की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दायर अर्जी में कहा गया था कि इसे लेकर मौजूदा नियम कमजोर हैं और इस वजह से जो भी विदेशी बच्चे को गोद ले रहे हैं, उसमें हेरफेर की संभावना है. इसके जरिए मानव तस्करी भी हो रही है. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि कई विदेशी, बच्चे को गोद लेते हैं और उनसे देह व्यापार और अन्य तरह के गैर कानूनी तरीके काम करवाते हैं. मौजूदा नियम भारतीय जोड़ों(कपल्स) के लिए सख्त है लेकिन विदेशियों के लिए इतने कड़े कानून नहीं है.

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कोर्ट का CBI जांच से इनकार
सीबीआई जांच की मांग को ठुकराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के पास अगर गोद लेने के मामले में कोई सबूत और साक्ष्य हैं कि विदेशियों द्वारा गोद लेने की प्रक्रिया में करप्शन हुआ है तो वो सीबीआई की जांच को लेकर अलग से याचिका दायर कर सकते हैं.

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