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LIVE: SC में मुस्लिम पक्ष बोला- बाबर नहीं था विध्वंसक, मीर बाकी ने बनाई मस्जिद

शुक्रवार को अयोध्या के रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद की रोजाना सुनवाई का 37वां दिन है. सुप्रीम कोर्ट में 17 अक्टूबर तक मामले की सुनवाई होना है.

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या केस की सुनवाई का 37वां दिन सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या केस की सुनवाई का 37वां दिन

  • सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या सुनवाई का 37वां दिन
  • शनिवार को मामले की सुनवाई नहीं करेगा SC
  • सोमवार से शुक्रवार तक हो रही है सुनवाई

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने शुक्रवार को अयोध्या मामले की सुनवाई के दौरान कहा है कि बेंच शनिवार को इस मसले की सुनवाई नहीं करेगी. शुक्रवार को अयोध्या के रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद की रोजाना सुनवाई का 37वां दिन है. पहले सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सुनने के लिए 18 अक्टूबर तक की तारीख तय की थी, लेकिन अब इसमें बदलाव कर दिया है. अब सुप्रीम कोर्ट ने 17 अक्टूबर तक मामले की बहस पूरी करने का निर्देश दिया है. शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष की ओर से राजीव धवन ने अदालत में अपनी दलीलें रखीं.

शुक्रवार की सुनवाई...

04.30 PM: जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को कहा कि वो मामले की बहस 17 अक्टूबर तक पूरी करे लें. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को 18 अक्टूबर तक बहस पूरी करने के लिए कहा था.

03.30 PM: सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा कि क्या इस बात का कोई सबूत है कि बाबर ने बाबरी मस्जिद को कोई इमदाद दी हो? इसपर राजीव धवन ने कहा कि उस दौर में इसका कोई सबूत हमारे पास नहीं है, सबूत मंदिर के दावेदारों के पास भी नहीं है.

राजीव धवन ने कहा कि 1855 में एक निहंग वहां आया और उसने वहां गुरु गोविंद सिंह की पूजा की और निशान लगा दिया था, बाद में सारी चीजें हटाई गईं.

ब्रिटिश हुकूमत के गवर्नर जनरल और फैज़ाबाद के डिप्टी कमिश्नर ने भी पहले बाबर के फरमान के मुताबिक मस्जिद की देखभाल और रखरखाव के लिए रेंट फ्री गांव दिए फिर राजस्व वाले गांव दिए. आर्थिक मदद की वजह से ही दूसरे पक्ष का एडवर्स पजिशन नहीं हो सका.

उन्होंने कहा कि 1934 में मस्जिद पर हमले के बाद नुकसान की भरपाई और मस्जिद की साफ-सफाई के लिए मुस्लिमों को मुआवजा भी दिया गया. उन्होंने कहा कि 10 दिसंबर 1884 में भी एक बैरागी फकीर मस्जिद की इमारत में घुस कर बैठ गया था, प्रशासन की चेतावनी पर वो बाहर नहीं निकला तो उसे जबरन निकाला गया और उसका लगाया झंडा भी उखाड़ा गया. 

01.35 PM: सुप्रीम कोर्ट में राजीव धवन ने कहा कि 1934 में दंगा-फसाद के बाद ही ये तय हो गया था कि हिंदू बाहर पूजा करेंगे, तो 22/23 दिसंबर 1949 की रात हिंदू इमारत में कैसे गए? संविधान के अनुच्छेद 12 के जरिए देश भर के सार्वजनिक संस्थान भी नियमित किए गए. उन्होंने कहा कि 1934 में दंगों के दौरान इमारत को नुकसान पहुंचा और धारा 144 लगाई गई.

राजीव धवन ने कहा कि ये बाबर पर मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने का इल्जाम लगाते हैं, बाबर कोई विध्वंसक नहीं था. मस्जिद तो मीर बाकी ने बनाई, एक सूफी के कहने पर. इस दौरान उन्होंने पढ़ा कि ‘है राम के वजूद पर हिन्दोस्तां को नाज़ अहले नज़र समझते हैं उसको इमाम ए हिन्द!’

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11.30 PM: मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने अदालत में कहा कि सांप्रदायिक विभाजन का आरोप मुसलमानों पर लगाया जाता है लेकिन ये उनपर (हिंदू पक्ष) पर भी लागू होता है जब उन्होंने बाबरी मस्जिद को ढहाया था. इसके पहले 1934, 1949 में भी ऐसा ही किया गया था.

11.00 AM: शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष की ओर से राजीव धवन ने अपनी दलीलें शुरू कीं. सुनवाई के दौरान जस्टिस बोबड़े ने पूछा कि क्या इस्लाम में देवत्व को किसी वस्तु पर थोपा जाता है? इस पर मुस्लिम पक्ष की ओर से जवाब दिया कि दोनों धर्मों में ऐसा ही होता है, इस्लाम में मस्जिद इसका उदाहरण है.

जस्टिस बोबड़े ने कहा कि हम हमेशा सुनते हैं कि ऐसा कुछ नहीं है, आप अल्लाह की पूजा करते हैं ना कि किसी वस्तु की. हम देखना चाहते हैं कि क्या किसी संस्था ने मस्जिद को पूज्य माना है, क्योंकि सिर्फ अल्लाह को पूजे जाने की बात आती है.

मुस्लिम पक्ष की ओर से राजीव धवन ने कहा कि हम (मुस्लिम) पांच बार अल्लाह की पूजा करते हैं, नमाज़ मस्जिद में अदा की जाती है. उन्होंने कहा कि इस मामले में मस्जिद पर जबरन कब्जा किया गया, लोगों को धर्म के नाम पर उकसाया गया, रथयात्रा निकाली गई, लंबित मामले में दबाव बनाया गया.

मुस्लिम पक्ष की ओर से कहा गया कि मस्जिद ध्वस्त की गई और उस समय मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह ने एक दिन कि जेल अवमानना के चलते काटी. अदालत से गुजारिश है कि तमाम घटनाओं को ध्यान में रखें.

अब कब-कब होगी सुनवाई?

बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की ओर से कहा गया था कि वह हफ्ते में पांच दिन इस मामले को सुनेंगे और अगर जरूरत पड़ेगी तो शनिवार को भी अदालत इस मामले को सुन सकती है. अभी अयोध्या केस की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में सोमवार से शुक्रवार तक हो रही है, अदालत रोजाना एक घंटे अधिक मसले को सुन रही है.

गुरुवार को अदालत में क्या हुआ?

सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को हिंदू पक्षकार की ओर से दलीलें रखी गईं. गुरुवार को पहले रामलला के वकील की ओर से पक्ष रखा गया, फिर निर्मोही अखाड़ा और बाद में गोपाल सिंह विशारद की ओर से पक्ष रखा गया. इन दलीलों के बाद मुस्लिम पक्ष इन दलीलों का जवाब देगा.

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