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कश्मीर में बंदिशों पर SC सख्त, कहा- केंद्र 7 दिनों में करे फैसलों की समीक्षा

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में लगाई गई तरह-तरह की पाबंदियों को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तल्ख टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट बैन और धारा 144 तभी लगाया जा सकता है जब उसकी अत्यंत जरूरत हो.

सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

  • कश्मीर में बंदिशों को लेकर अदालत का फैसला
  • इंटरनेट बैन की हो समीक्षा, 7 दिन में रिव्यू करे सरकार

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में लगाई गई तरह-तरह की पाबंदियों को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तल्ख टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट बैन और धारा 144 तभी लगाया जा सकता है जब उसकी अत्यंत जरूरत हो.

साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि लम्बे समय तक इंटरनेट पर पाबंदी और धारा 144 का लगाया जाना सरकार द्वारा अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करने जैसा है. कोर्ट की तरफ से यह तल्ख टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार 17 देशों के राजनयिकों को कश्मीर दौरे पर लेकर गई है.

कोर्ट ने सरकार को घाटी को लेकर जारी किए गए सभी आदेश को सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है. कोर्ट के इस निर्देश के बाद नरेंद्र मोदी सरकार को अब पाबंदी से संबंधित सभी जानकारियों को सामने रखना होगा.

इसमें सरकार को बताना होगा कि घाटी में कितने दिन से धारा 144 लागू की गई है और उसका आधार व कारण क्या हैं. कोर्ट ने कहा कि कमेटी 7 दिन के भीतर इंटरनेट बैन और धारा 144 की समीक्षा करे.

गुलाम नबी आजाद ने किया स्वागत

कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि जम्मू-कश्मीर का हर नागरिक सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का इंतजाम कर रहा था. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ये स्पष्ट कर दिया है कि भारत सरकार ने 5 अगस्त 2019 से जितने भी आदेश जारी किए हैं, उन्हें सार्वजनिक किए जाएं. उन्होंने कहा कि कोर्ट ने यह भी कहा है कि इंटरनेट बैन का सरकार का कोई भी आदेश न्यायिक समीक्षा के तहत आता है.

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