आगामी दो सितम्बर को पूरे भारत के 68 डिवीजनों के रेलवे स्टेशन मास्टर दिल्ली में धरना देकर वित मंत्रालय का घेराव करेंगे. ये वेतनमान में सुधार की मांग कर रहे हैं.
हरिद्वार में स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित दो वर्षीय जोनल मीटिंग में उत्तर रेलवे के पांचों मंडलों मुरादाबाद, दिल्ली, लखनऊ, फिरोजपुर और अम्बाला के विभिन्न रेलवे स्टेशनों के 300 से अधिक स्टेशन मास्टरों ने जमा होकर यह निर्णय लिया.
एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव वीएन चौधरी ने कहा कि रेल मंत्रालय ने उनके प्रस्ताव पर विचार करते हुए इस विसंगति को स्वीकार करते हुए साल 2010 में स्टेशन मास्टर की नियुक्ति वेतनमान 2800 से बढ़रकर 4200 करने की सिफारिश की थी. उसे वित मंत्रालय के पास भेजा था, लेकिन वित्त मंत्रालय में पिछले पांच साल से मामला लटका है.
बैठक में आठ सूत्रीय प्रस्ताव पारित किए गए, जिनमें स्टेशन मास्टरों का न्यूनतम वेतनमान 4600 तय करने, 30 प्रतिशत सुरक्षा भत्ता देने, तीन से सात लगातार रात्रि ड्यूटी रोस्टर समाप्त करना, स्टेशन मास्टरों के परिवारों की शिक्षा और सुरक्षा के साथ केन्द्रीयकृत आवास व्यवस्था बनाए जाने, वाशिंग अलाउन्स, सेन्टलाइज्ड पैनल स्टेशनों में अतिरिक्त स्टेशन मास्टरों की नियुक्ति के प्रस्ताव पारित किए गए.
चौधरी ने कहा अगर सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट आने से पहले हमारी मांगों को स्वीकृति नहीं मिली, तो हम दो सितम्बर के धरने के अलावा 23 नवम्बर को केन्द्रीय कर्मचारी संगठन द्वारा आयोजित राष्ट्रव्यापी हड़ताल का हिस्सा बनकर खुद रेल के सामने खडे होकर रेल रोकेंगे.
हरिद्वार से बीजेपी सांसद रमेश पोखरियाल निशंक तथा सांसद तरुण विजय ने मुख्य अतिथि के तौर पर कार्यक्रम में शिरकत कर स्टेशन मास्टरों की समस्या सरकार के सामने रखने और मनवाने का आश्वासन दिया.
इनपुट: भाषा