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ऐसे होती है रिपब्लिक डे परेड की तैयारी

गणतंत्र दिवस परेड की भव्यता के पीछे 1 करोड़ घंटों की मैनपावर होती है. महज 90 मिनटों में आपके सामने से गुजर जाने वाली रिपब्लिक डे परेड के पीछे दरअसल करीब 9 महीने से भी ज्यादा की लगातार तैयारी होती है.

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अगर आपसे पूछा जाए कि गणतंत्र दिवस का सबसे बड़ा आकर्षण क्या है तो जाहिर है आपमें से ज्यादातर का जवाब होगा रिपब्लिक डे परेड. देशभर की झांकियों और तेज-तर्रार सैनिकों के कदमताल से सजी 26 जनवरी की परेड की तैयारी कैसे होती ये जानकार आप हैरान रह जाएंगे.

गणतंत्र दिवस परेड की भव्यता के पीछे 1 करोड़ घंटों की मैनपावर होती है. महज 90 मिनटों में आपके सामने से गुजर जाने वाली रिपब्लिक डे परेड के पीछे दरअसल करीब 9 महीने से भी ज्यादा की लगातार तैयारी होती है. करीब 144 की संख्या वाले 42 दल दिसंबर से दिल्ली में डट जाते हैं और शुरू हो जाती है तैयारी.

67 एजेंसियों के आपसी तालमेल की मिसाल
26 जनवरी को हर दर्शक के अंदर महज 90 मिनट में देशभक्ति का जज्बा, जुनून और शौर्य भर देने की रिपब्लिक डे परेड के प्रभारी-संयोजक और कर्नल कुलवीर सिंह कहते हैं कि ये परेड रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, दिल्ली पुलिस और पैरा मिलिट्री समेत कुल 67 एजेंसियों में आपसी तालमेल की शानदार मिसाल है. दरअसल परेड तो 26 जनवरी को खत्म हो जाती है लेकिन दो महीने बाद ही यानी मार्च अप्रैल से ही शुरू हो जाती है नए साल की परेड की तैयारी.

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पांच बार दोहराई जाती है पूरी परेड
कर्नल कुलवीर रिपब्लिक डे परेड के कॉर्डिनेटर हैं. यानी परेड की तैयारी मार्च-अप्रैल में शुरू करने के साथ परेड में सेलेक्ट हुए कंटिंजेंट की फाइनल 600 घंटे की ट्रेनिंग और फिर 5 रेगुलर प्रैक्टिस के साथ फुल ड्रेस रिहर्सल तक सब कुछ इनके संयोजन में ही होता है. परेड में हिस्सा लेने के लिए जिन टुकड़ियों और सैनिकों का चयन होता है, दो स्तर की ट्रेनिंग वो पहले अपने रेजिमेंट में ही पूरी करके दिसंबर में दिल्ली पहुंचते हैं, जहां तैयार होता है इनके लिए 600 घंटों की स्पेशलाइज्ड स्ट्रक्चर्ड ट्रेनिंग का शेड्यूल. इसके बाद पूरी परेड की 5 रेगुलर प्रैक्टिस होती हैं, यानी 5 बार पूरी परेड जस की तस दोहराई जाती है.

इनकी कदमताल से कांपता है दुश्मन का कलेजा
इसके बाद फुल ड्रेस रिहर्सल और तब जाकर 26 जनवरी को परेड देशवासियों की शान में अपना शौर्य राजपथ में बिखेरती है. परेड किसी भी देश के लिए शक्ति प्रदर्शन के मौके की तरह होता है. ये दिखाने का अवसर कि हमारे सिपाहियों के शरीर मांस के नहीं बल्कि लोहे के बने हैं और राजपथ पर एक सुर में इनके कदमताल दुश्मनों के दिल कंपाने के लिए काफी हैं.

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