भारत में पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने एक विवादास्पद बयान दिया. इसमें बासित ने कहा कि 2016 में आतंकी बुरहान वानी की हत्या के बाद उन्होंने प्रख्यात सोशलाइट-कॉलमनिस्ट शोभा डे से जम्मू-कश्मीर में जनमत संग्रह के पक्ष में लेख लिखवाई थी. हालांकि शोभा डे ने इस दावे का खंडन करते हुए बासित को झूठा बताया है.
पाकिस्तानी ब्लॉगर फरहान विर्क को दिए एक इंटरव्यू में बासित ने कहा, 'मेरे लिए यह चुनौतीपूर्ण कार्य था कि किसी पत्रकार को इस बात के लिए मनाया जाए कि वह कश्मीर में जनमत संग्रह के फैसले के अधिकार को लेकर अखबार में एक आलेख लिखे.'
#WATCH Columnist Shobhaa De responds to claims by Former Pakistan High Commissioner to India, Abdul Basit, that he managed to influence her writings on Kashmir pic.twitter.com/784dub1wBW
— ANI (@ANI) August 12, 2019
बासित ने आगे बताया, 'आखिरकार मुझे महिला पत्रकार शोभा डे मिलीं, जो काफी प्रख्यात हैं. वह एक लेख लिख रही थीं. मैं उनसे मिला और उनको समझाया. उन्होंने आलेख के आखिर में लिखा कि अब समय आ गया है कि जनमत संग्रह के माध्यम से कश्मीर मसले का हमेशा के लिए समाधान किया जाए.'
बासित के दावे पर अपनी प्रतिक्रिया में शोभा डे ने कहा कि वह निंदनीय व्यक्ति हैं, जो न सिर्फ उन्हें, बल्कि भारत को बदनाम करने के लिए एक कहानी गढ़ रहे हैं.
बासित के सनसनीखेज दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए, शोभा डे ने ट्विटर पर एक वीडियो में कहा, आम तौर पर वह बासित की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया नहीं देतीं, लेकिन इस बार उसके झूठ का पर्दाफाश करना बेहद जरूरी है. विशेष रूप से तब जरूर जब वह न केवल मुझे बल्कि भारत को भी बदनाम करने के लिए एक कहानी बना रहा हो.
शोभा डे ने कहा कि बासित ने इस साल जनवरी में जयपुर लिटफेस्ट मुलाकात हुई थी और यह पहली और आखिरी मुलाकात थी.
शोभा डे ने कहा, वह आया और एक छोटे से समूह में शामिल हो गया, एक वार्तालाप का प्रयास किया, जिसके बाद उसकी अनदेखी कर वहां से चले जाने के लिए कहा गया.' आगे उन्होंने कहा, 'उन 3 मिनटों में उसने कई मुद्दों को शामिल करने की कोशिश की, लेकिन एक मुद्दे पर वो पूरी तरह घिर गया, जब हमने चीन का जिक्र किया. उसके बाद वो वहां दिखाई नहीं दिया.'
शोभा डे ने कहा, 'यह यह पहली और आखिरी बार था जब मैं उससे मिली. वह जिसका उल्लेख कर रहा है वह 2016 में लिखा गया एक कॉलम है.'
आगे उन्होंने कहा कि मैं ऑन रिकॉर्ड कहना चाहती हूं कि वह बहुत खतरनाक खेल खेल रहा है. मैं सच्चाई में विश्वास करती हूं. मैं देशभक्त और सच्ची भारतीय हूं. मुझे बुरा लग रहा है कि उसने ऐसा करने की हिम्मत कैसे की.