तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले की बेंगलुरु की एक निचली अदालत में चल रही सुनवाई पर लगी रोक को बढ़ाने से इनकार कर दिया है. निचली अदालत में सुनवाई पर रोक ना लगाने के कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ जयललिता और शशिकला ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
26 मई को सुप्रीम कोर्ट ने 6 जून तक ये रोक लगाई थी जिसे कोर्ट ने बढ़ाकर 16 जून तक कर दिया था जिसे और बढ़ाने की मांग थी. जयललिता उस वक्त तक मुकदमे पर रोक की मांग कर रही थीं जब तक निचली अदालत चेन्नई की कंपनी लेक्स प्रॉपर्टी डेवलपमेंट (प्राइवेट) लिमिटेड की अर्जी पर फैसला नहीं कर लेती. कंपनी का आरोप है कि जयललिता की बेनामी संपत्ति के रूप में अधिकारियों ने जिन संपत्तियों को कुर्क किया दरअसल वह उसकी संपत्ति है और आय से अधिक संपत्ति के मामले में मुकदमा आगे बढ़ाने से पहले निचली अदालत में लंबित इस अर्जी पर फैसला होना चाहिए.
खास बात ये है कोर्ट में सुनवाई के दौरान इस मामले में अभियोजन पक्ष तमिलनाडु के विजिलेंस और एंटी करप्शन डायरेक्टोरेट ने जयललिता की याचिका का पुरजोर विरोध किया. डायरेक्टोरेट ने कहा कि जयललिता की इस याचिका का मकसद सिर्फ निचली अदालत में चल रही सुनवाई में देरी करने का है.
निचली अदालत में साल 2010 से जयललिता के खिलाफ आय से अधिक सम्पत्ति के मामले की सुनवाई चल रही है और सुनवाई तकरीबन पूरी होने वाली है. जयललिता पर अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से 66 करोड़ रुपये अधिक जमा करने का आरोप है. इस मामले में वी के शशिकला, वी एन सुधाकरण और जे इलावरसी भी मुकदमे का सामना कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 2003 में आय से अधिक संपत्ति के मामले को बंगलुरु भेज दिया गया था.
कोर्ट ने एक याचिका पर ये निर्देश दिया था जिसमें आरोप लगाया गया था कि जयललिता के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए तमिलनाडु में मामले की निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है. उस वक्त जयललिता तमिलनाडु की मुख्यमंत्री थीं. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब निचली अदालत में 19 जून की तय तारीख पर इस मामले की अगली सुनवाई होगी.