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सरबजीत का परिवार आज पाकिस्‍तान जाएगा

सरबजीत का परिवार रविवार को उसके साथ होगा. सरबजीत का परिवार रविवार दोपहर 12 बजे लाहौर के लिए रवाना होगा. लाहौर के जिन्ना अस्पताल में ही सरबजीत जिंदगी की जंग लड़ रहा है.

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सरबजीत का परिवार रविवार को उसके साथ होगा. सरबजीत का परिवार रविवार दोपहर 12 बजे लाहौर के लिए रवाना होगा. लाहौर के जिन्ना अस्पताल में ही सरबजीत जिंदगी की जंग लड़ रहा है.
खास बात है कि सालों बाद सरबजीत का परिवार उसे देखेगा भी तो डीप कोमा की हालत में. 23 साल बाद मायूस आंखों में झलकेगी उम्मीद की रोशनी. 23 साल का इंतजार रविवार को खत्म होगा क्योंकि रविवार को सरबजीत की पत्नी को होगा अपने पति का दीदार.
पिता के होते हुए भी उसके साए से महरुम रहीं बेटियां भी आज हर दर्द हर गम को भूल कर जा रही हैं पाकिस्तान. डीप कोमा में पहुंच चुके पिता सरबजीत को देखने की खुशी बेटियों के हर शब्द से झलक रही है.
दो दशक से ज्यादा समय से भाई की तस्वीर को राखी बांधती आई एक बहन का भी आज खत्म होगा इंतजार. डीप कोमा में गए भाई से जल्द स्वस्थ होने का वादा लेने पाकिस्तान जा रही है सरबजीत की बहन.
दर्द के 23 साल इस परिवार ने कैसे बिताए होंगे ये बयां करना नामुमकिन है लेकिन उस दर्द को सीने में छिपाए सरबजीत का परिवार थोड़ी देर बाद लाहौर के लिए रवाना हो जाएगा, जहां अस्पताल में सरबजीत जिंदगी की जंग लड़ रहा है.
वीजा मिलने के बाद सरहद पार जाने का रास्ता इस परिवार के लिए मुमकिन हुआ और अब ये सरबजीत का इलाज खुद अपनी आंखों से देखना चाहते हैं.
सरबजीत की बेटियां अब इतनी बड़ी हो गयी हैं कि वो मां के दुख को महसूस कर सकती है और बुआ की तड़प को भी समझती हैं. पिता के जख्मी होने की खबर के बाद वो जल्दी से जल्दी लाहौर पहुंचना चाहती हैं. सरबजीत की बेटी स्वपनदीप कौर को भरोसा है कि उसके पापा जल्द ठीक हो जाएंगे.
सरबजीत सिंह की बेटी स्वपनदीप कौर का कहना है कि मैं राहत महसूस कर रही हूं, मुझे पापा को देखने का मौका मिला है. हमलोग उनके इलाज के दौरान साथ में होंगे. अगर संभव हुआ तो हम उन्हें दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करेंगे.
परिवार को ही नहीं पूरे देश को भरोसा है कि सरबजीत सिंह की सेहत में जल्द सुधार होगा. वो डीप कोमा से जल्द बाहर निकल सकेगा. 24 घंटे निकल गए तो सरबजीत की जिंदगी लौट सकती है.
लाहौर की कोट लखपत जेल में सरबजीत को दो कैदियों ने इतना लहूलुहान किया था कि वो मौत की दहलीज पर जा पहुंचा लेकिन कहते हैं कि दुआओं में दम होता है और बुरे वक्त में अगर अपने साथ हों तो जख्म जल्द भर जाते हैं. उम्मीद है कि मुश्किल हालात में सरबजीत के पास उसके परिवार की मौजूदगी उसे नई जिंदगी दे सकेगी.

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