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पोखरण-2 पर संथानम का दावा स्तब्धकारी

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम. के. नारायणन ने पोखरण-2 परमाणु परीक्षणों पर डीआरडीओ के एक पूर्व वैज्ञानिक के दावों को ‘‘स्तब्धकारी’’ करार दिया है.

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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम. के. नारायणन ने पोखरण-2 परमाणु परीक्षणों पर डीआरडीओ के एक पूर्व वैज्ञानिक के दावों को ‘‘स्तब्धकारी’’ करार देते हुए कहा कि भारत के पास थर्मोन्युक्लियर क्षमता है जिसकी पुष्टि गणमान्य अनुसंधानकर्ताओं का एक दल कर चुका है.

‘‘सर्वाधिक प्रमाणिक’’ बयान दिया जा चुका है
नारायणन ने कहा कि गणमान्य वैज्ञानिकों के एक समूह पर आधारित परमाणु उर्जा आयोग (एईसी) पिछले हफ्ते 1998 के परमाणु परीक्षणों की प्रभावक्षमता पर ‘‘सर्वाधिक प्रमाणिक’’ बयान दे चुका है और इस मुद्दे पर सरकार की ओर से किसी अतिरिक्त स्पष्टीकरण की कोई आवश्यकता नहीं है. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा, ‘‘वे 1998 में संतुष्ट थे और वे 2009 में संतुष्ट हैं.’’ नारायणन ने कहा कि हाइड्रोजन बम की प्रभाव क्षमता पर पूर्व डीआरडीओ वैज्ञानिक के. संथानम के बयान से उभरे विवाद के आलोक में स्वतंत्र आयोग और इस तरह के मामलों पर सर्वोच्च निकाय एईसी से 1998 के परमाणु परीक्षणों के आंकड़ों का एक बार फिर अध्ययन करने को कहा गया था.

हमने वह कर लिया जो हमें करना था
नारायणन ने कहा, ‘‘मैं समझता हूं कि हमने वह कर लिया जो हमें करना था. उसके आगे मैं नहीं जानता कि हम क्या कर सकते हैं.’’ सीएनआर राव, पी. रामा राव और एम. आर. श्रीनिवासन जैसी जानी मानी वैज्ञानिक हस्तियां एईसी की सदस्य थी और परमाणु कार्यक्रम के पुरोधा राजा रमन्ना उस सर्वोच्च निकाय के हिस्सा थे जिसने 1998 के परमाणु परीक्षण के निष्कर्षों का अध्ययन किया था. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा, ‘‘थर्मोन्युक्लियर डिवाइस (हाइड्रोजन बम) का उत्पादन (विस्फोट से निकली उर्जा) 45 किलोटन का था. मैंने अपने शब्द बड़े एहतियात से चुने हैं, 45 किलोटन और कोई व्यक्ति इसका खंडन नहीं कर सकता जो आंकड़ों से साबित हुई हकीकत है जो वहां है और उनमें श्री संथानम शामिल हैं जिन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं है कि वह किस बाबत बात कर रहे हैं.’’ नारायणन ने दावा किया कि दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने परमाणु परीक्षणों की प्रकृति के बारे में लिखे गये एईसी अध्यक्ष अनील काकोडकर और वरिष्ठ वैज्ञानिक एस के सिक्का के ‘‘अत्यंत प्रमाणिक आलेख’’ की समीक्षा की है.

संथानम की पहुंच जरूरी सूचना तक नहीं
उन्होंने कहा कि एईसी के पूर्व अध्यक्ष पी. के. आयंगर ने स्वीकार किया था कि थर्मोन्युक्लियर परीक्षण का उत्पादन ‘‘संभवत: 45 किलोटन रही और विखंडन एवं फ्यूजन प्रतिक्रियाओं के एक साथ होने पर शक जताया था.’’ नारायणन ने कहा, ‘‘तमाम परमाणु वैज्ञानिक सत्ता प्रतिष्ठान के हिस्सा हैं. वे जिन्हें संशय था, वही डॉ. आयंगर, डॉ. ए. एन. प्रसाद, वही जिन्हें असैनिक परमाणु पहल पर संशय था.’’ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि संथानम की पहुंच उस सूचना तक नहीं है जहां परीक्षण के आंकड़े दर्ज किए गए हैं.’’ नारायणन ने कहा, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की हैसियत से मैं जानता हूं कि डीआरडीओ से क्या करने और कितनी जानकारी रखने की अपेक्षा की जाती है. मैं समझता हूं कि संथानम सिर्फ अतिशयोक्तिपूर्ण बात ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि कुछ ऐसी बात कर रहे हैं जो स्तब्ध करने वाला है.’’

सार्वजनिक बहस की जरूरत नहीं
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर किसी सार्वजनिक बहस की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि इसके लिए विस्फोटक बैलिस्टिक्स, न्यूट्रोन फिजिक्स, मैटरियल साइंस और कंप्यूटर सिमुलेशन की स्पष्ट समझ जरूरी है. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से जब हाइड्रोजन बम की प्रभाव क्षमता पर उठाये गए पूर्व सेना प्रमुख वी. पी. मलिक के सवाल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘‘मैं समझता हूं कि इस मुद्दे पर इसका जवाब देने वाले मौजूदा प्रमुख ना कि पूर्व प्रमुख हैं.’’ नारायणन ने कहा, ‘‘हमारे पास थर्मोन्युक्लियर क्षमताएं हैं. मुझे पक्का यकीन है. हम इस बिंदू पर बहुत स्पष्ट हैं. अगर आप उनमें से किसी एक से किसी शहर पर हमला करेंगे, आप करीब 50,000 से 1,00,000 मौतों की की चर्चा कर रहे हैं.’’

मीडिया में स्‍वार्थपूर्ण प्रचार किया जा रहा है
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि ‘‘विभिन्न लोगों की ओर से’’ मीडिया में ‘‘स्वार्थपूर्ण प्रचार चलाया जा रहा है’’ जो सरकार के लिए चिंता का विषय है. परमाणु अप्रसार संधि पर तमाम देशों के हस्ताक्षर का आह्वान करने वाले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव पर जोर देने के अमेरिकी कदम के बारे में उन्होंने कहा कि अमेरिकी नेताओं के समक्ष इस मुद्दे को पहले ही उठाया जा चुका है और उन्होंने भारत को आश्वस्त किया है कि यह असैनिक परमाणु संधि को प्रभावित नहीं करेगी. उन्होंने बताया कि गैर परमाणु देशों को संवर्धन और पुन: संवर्धन प्रौद्योगिकियों बेचने पर प्रतिबंध पर समूह 8 देशों को सहमत करने की अमेरिका की कोशिशों के मद्देनजर भारत ने उन देशों से भी चर्चा की है जिनके साथ उसने परमाणु संधियां की हैं.

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