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संघ ने किया आगाह: दिल्ली जैसा धोखा खाने से बचे बीजेपी

दिल्ली के नतीजों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की आंखें खोल दी हैं. शायद इसीलिए संघ चाहता है कि बीजेपी भी आंखें खुली रखे. संघ ने अपने सर्वे में पाया है कि जो स्थिति महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में थी वैसी कतई बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में नहीं रहने वाली है.

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मोहन भागवत, नरेंद्र मोदी
मोहन भागवत, नरेंद्र मोदी

दिल्ली के नतीजों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की आंखें खोल दी हैं. शायद इसीलिए संघ चाहता है कि बीजेपी भी आंखें खुली रखे. संघ ने अपने सर्वे में पाया है कि जो स्थिति महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में थी वैसी कतई बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में नहीं रहने वाली है.

चेतावनी भरी सलाह
राष्ट्रीय स्वयंयेवक संघ को अपने संगठनों के सर्वे से पता चला है कि बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में जमीनी हालात बीजेपी के लिए उतने अच्छे नहीं हैं जितने हरियाणा, महाराष्ट्र व झारखंड में थे. संघ ने हालात के हिसाब से तैयारियों पर जोर दिया है. तीनों राज्यों में सबसे पहले बिहार में चुनाव होने जा रहे हैं.

बिहार - 2015
बिहार में इस साल के आखिर में चुनाव होने हैं. वैसे तो दिल्ली के नतीजों के फौरन बाद ही बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कार्यकर्ताओं से कह दिया था कि वे बिहार पर फोकस करें और तैयारियों में जुट जाएं. हाल के दिनों में शाह बिहार का दौरा भी कर चुके हैं. बाकी जगहों से अलग बिहार में बीजेपी एकला चलो फॉर्मूला पर फिलहाल तो नहीं चल रही है. बिहार में बीजेपी गठबंधन की राह पर चलने की सोच रही है. उपेंद्र कुशवाहा और रामविलास पासवान के बाद बिहार में बीजेपी का जीतन राम मांझी के साथ भी गठबंधन हो सकता है. मांझी की दिल्ली में बीजेपी के आला नेताओं से मुलाकात भी हो चुकी है. महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड जैसे हालात बिहार में भले न हो लेकिन दिल्ली से तो बिलकुल अलग है. दिल्ली में कोई सरकार नहीं थी, लेकिन बिहार में नीतीश कुमार की सरकार है. नीतीश ने सुशासन जारी रखने के नाम पर सत्ता की चाबी फिर से अपने हाथ में ले ली है. अब अगर नीतीश का सुशासन एंटी इंकम्बेंसी फैक्टर पर भारी पड़ता है तो बीजेपी के लिए निश्चित तौर पर राह मुश्किल भरी हो सकती है.

पश्चिम बंगाल - 2016
बिहार के बाद बीजेपी का जोर पश्चिम बंगाल पर है जहां अगले साल चुनाव होने हैं. शारदा चिटफंड घोटाले में तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं की गिरफ्तारी के बावजूद हाल के उपचुनाव में जीत ममता बैनर्जी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. पश्चिम बंगाल में भी अगर बीजेपी एंटी इंकम्बेंसी फैक्टर का फायदा उठाना चाहेगी तो रेस में उसे वाम दलों से भी टक्कर लेनी होगी. संघ को ये बात समझ में पहले ही आ गई है इसीलिए वो बीजेपी को आगाह कर रहा है.

उत्तर प्रदेश - 2017
उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव तो 2017 में होंगे लेकिन संघ अभी से तैयारियों के पक्ष में है. संघ के आकलन के हिसाब से उत्तर प्रदेश में लोक सभा जैसी स्थिति तो अब कतई नहीं है. संघ के हिसाब से यूपी में बीजेपी पर मायावती की पार्टी बीएसपी भारी पड़ सकती है.

क्या संघ को लग रहा है कि मोदी लहर की तासीर कुछ हल्की पड़ रही है? संघ की सलाह मानना बीजेपी का कर्तव्य ही नहीं फिलहाल मजबूरी भी है - और जरूरत भी.

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