उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 62 से बढाकर 65 साल करने के प्रस्ताव को सरकार ने मंजूरी दे दी. इस आशय का विधेयक संसद में पेश किया जाएगा. इस कदम से देश के 21 उच्च न्यायालयों के लगभग 630 न्यायाधीशों को फायदा होगा.
सरकारी सूत्रों ने बताया कि कानून मंत्रालय मानसून सत्र में ही यह विधेयक पेश करना चाहती है लेकिन संविधान संशोधन करने के लिए सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लेना आवश्यक है, क्योंकि लोकसभा और राज्यसभा में किसी भी संविधान संशोधन विधेयक का दो तिहाई बहुमत से पारित होना अनिवार्य है.
सूत्रों ने कहा कि कानून मंत्री वीरप्पा मोइली चाहते हैं कि संशोधन करने से पहले इसे लेकर आम सहमति कायम की जाए. इससे पहले 1963 में उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढाकर 62 साल की गयी थी.
अप्रैल 2008 में प्रस्ताव को तत्कालीन कानून मंत्री हंसराज भारद्वाज ने पेश किया था लेकिन आम सहमति नहीं बन पाने के कारण प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया था.