राष्ट्रपति भवन में शनिवार को एक भावुक पल देखने के मिला. जब पद्म श्री पुरस्कार लेने पहुंचीं सालूमरदा थिमक्का उर्फ ‘वृक्ष माता’ ने राष्ट्रपति भवन के प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए राम नाथ कोविंद को आशीर्वाद दिया. थिमक्का ने आशीर्वाद स्वरूप राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के माथे को हाथ लगाया. आमतौर पर ऐसा कम ही देखने को मिलता है.
तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजा कक्ष
थिमक्का के इस सहज कदम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य मेहमानों के चेहरे पर मुस्कान आ गई और समारोह कक्ष उत्साहपूर्वक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. इस दौरान राष्ट्रपति कोविंद के चेहरे पर भी हल्की सी मुस्कान आ गई. कड़े प्रोटोकाल के तहत आयोजित होने वाले समारोह में हल्के हरे रंग की साड़ी पहने थिमक्का ने अपने मुस्कुराते चेहरे के साथ माथे पर ‘त्रिपुण्ड्र’लगा रखा था.
At the Padma awards ceremony, it is the President’s privilege to honour India’s best and most deserving. But today I was deeply touched when Saalumarada Thimmakka, an environmentalist from Karnataka, and at 107 the oldest Padma awardee this year, thought it fit to bless me pic.twitter.com/Ihmv9vevJn
— President of India (@rashtrapatibhvn) March 16, 2019
कौन हैं 'वृक्ष माता' थिमक्का
सालूमरदा थिमक्का कर्नाटक की रहने वाली हैं. वह पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता हैं. थिमक्का ने बरगद के 400 पेड़ों समेत 8000 से ज्यादा पेड़ लगाएं हैं और यही वजह है कि उन्हें ‘वृक्ष माता’की उपाधि मिली है. उन्हें राष्ट्रपति भवन में शनिवार को अन्य विजेताओं के साथ पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया. प्रकृति के प्रति उनका लगाव देखते हुए थिमक्का का नाम 'सालूमरादा' रख दिया गया. अभी उनकी उम्र 107 साल है.
Moment of the Day!
Loved the way she blessed President Kovind while receiving #PadmaShri.
Saalumarada Thimmakka has earned the nickname of 'Vriksha Mathe (mother of trees)' for planting 8,000 trees. pic.twitter.com/tZguQyGG9l
— RK Sinha (@RKSinhaBJP) March 16, 2019
कहां से मिली थिमक्का को प्रेरणा
थिमक्का की कहानी धैर्य और दृढ़ संकल्प की कहानी है. उन्हें शादी के काफी समय बाद भी उन्हें बच्चा नहीं हुआ. जब वह उम्र के चौथे दशक में थीं तो बच्चा न होने की वजह से खुदकुशी करने की सोच रही थीं, लेकिन अपने पति के सहयोग से उन्होंने पौधरोपण में जीवन का संतोष तलाश लिया. इसके बाद थिमक्का ने पीछे मुढ़ कर नहीं देखा और 8000 से ज्यादा पेड़ लगा दिए. उनके इस कार्य के लिए उन्हें कई अवॉर्ड्स भी मिल चुकें.