रेल मंत्री पीयूष गोयल ने आर्थिक पैकेज पर कहा कि हमारी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक-एक वर्ग पर चिंता व्यक्त की है. कल उन्होंने एमएसएमई के लिए कई घोषणाएं की. आज उन्होंने किसानों, छोटे काम में लगे लोगों की चिंता, घर खरीदने वालों की चिंता की. सभी वर्ग के लोगों की चिंता की जा रही है. आजतक के साथ हुई विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था पटरी पर वापस आ जाए, इस पर भी काम किया जा रहा है. इसके साथ ही लोगों का जीवन स्तर कैसे सुधरे इस पर भी चिंता की जा रही है. प्रवासी मजदूरों के लिए कम किराए पर आवास उपलब्ध कराने का कदम उठाया गया है.
श्रमिक स्पेशल ट्रेनों और मजदूरों के पलायन पर आजतक से खास बातचीत में रेल मंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि हमारे तमाम प्रयासों के बावजूद कई राज्य ट्रेन की सुविधा ले ही नहीं रहे हैं. भारतीय रेल ने जो सुविधा उपलब्ध कराई है उसमें हमने 1200 ट्रेनें पूरी तरह से श्रमिक ट्रेनों के लिए आरक्षित कर दी हैं. जिसके तहत हम हर रोज 250 से 200 ट्रेन हर रोज चला सकते हैं. पहली मई से पूरी तैयारी थी. हमारा अनुमान था कि राज्य सरकारें जो बड़ी-बड़ी बातें करते थे, सैकड़ों चिट्ठियां आती थीं कि ट्रेन चलाएं. लेकिन अब मुंबई को ही देख लीजिए. मुंबई से पश्चिम बंगाल को 6 मई से रोज चिट्ठियां जा रही हैं कि हमें पश्चिम बंगाल में ट्रेन भेजनी हैं अलग-अलग जगह. 17 ऐसी रिक्वेस्ट कल तक पश्चिम बंगाल को भेजी गई हैं. वैसे तो रिक्वेस्ट 100 ट्रेनों की है पर वो कह रहे हैं कि इन्हें कैसे भेजें जब पहले की 17 रिक्वेस्ट ही अप्रूव नहीं हुई हैं. मैंने खुद आज दोपहर तीन बजे फोनकर मुंबई से पूछा कि कोई परमिशन आई तो उन्होंने कहा कि जीरो, एक भी परमिशन नहीं आई.
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रेल मंत्री ने ममता सरकार पर हमला जारी रखते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल के लाखों प्रवासी देश के विभिन्न राज्यों में मजदूरी करते हैं. वो वापस घर जाना चाहते हैं. उनके लिए हम तीन घंटे में ट्रेनें उपलब्ध करा देंगे. आठ हजार स्टेशन हैं देश में जो स्टेशन राज्य सरकार कहे उस स्टेशन से ट्रेन उपलब्ध करा देंगे जिस जगह के लिए उन्हें परमिशन मिल जाए वहां तक के लिए. पश्चिम बंगाल सरकार ने पहले तो दो ट्रेनों की परमिशन दी. 8 तारीख की रात को जब गृह मंत्री जी ने पत्र लिखा और 9 तारीख की सुबह वो पत्र देश के सामने आया तब तक केवल दो ट्रेनों की परमिशन पश्चिम बंगाल की तरफ से थी. उस दिन दोपहर को हमें संदेश मिला कि 8 और ट्रेनें लेंगे. लेकिन अंत में पश्चिम बंगाल ने सिर्फ 5 और ट्रेनें ही लीं. यानी आज तक सिर्फ 7 ट्रेनें जा चुकी हैं.
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रेल मंत्री ने आगे कहा कि जब कल मैंने टीवी से दरख्वास्त की कि पश्चिम बंगाल और ट्रेन ले तो आज शाम साढ़े 6 बजे हमें सूचना मिलती है कि पश्चिम बंगाल अगले 30 दिनों में यानी कल से लेकर 15 दिन तक 105 ट्रेनें लेगा. 105 ट्रेन में केवल 2 लाख लोग जा पाएंगे जबकि वहां जाने वाले लोगों की संख्या करीब पचास लाख हैं. उनको तो रोज 105 ट्रेनें लेनी चाहिए तब लोगों को पैदल नहीं जाना पड़ेगा, सड़कों पर नहीं उतरना पड़ेगा, ट्रकों पर नहीं चढ़ना पड़ेगा.
रेल मंत्री बोले हर दिन 300 ट्रेन चला सकते हैं
बाकी राज्यों की मांग होने पर रेलवे की तैयारी को लेकर पीयूष गोयल ने कहा कि मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं कि छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान, पश्चिम बंगाल जो राज्य प्रवासी मजदूरों के लिए जितनी ट्रेन की परमिशन देगा हम चलाएंगे, हम 250 से 300 ट्रेन रोज चला सकते हैं. प्रधानमंत्री चाहते हैं कि हर प्रवासी को रेल की सुविधा मिले. उत्तर प्रदेश में 400 से अधिक ट्रेन चली गई, बिहार में 200 से अधिक ट्रेन चली गई फिर पश्चिम बंगाल में सिर्फ 7 ट्रेन क्यों गई है, राजस्थान में मात्र 18 ट्रेन क्यों गई हैं. झारखंड में 44 ट्रेन क्यों गई हैं. राज्यों को जनता को जवाब देना पड़ेगा कि उन्होंने ट्रेनें क्यों नहीं ली.
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इसके साथ ही रेल मंत्री ने प्रवासी लोगों से गुजारिश की कि आप सड़क पर ना निकलें, आप ट्रैक पर ना निकलें, आप साइकिल पर ना निकलें, आप बस और ट्रक पर ना चढ़ें. आप अपने नजदीकी कलेक्टर के पास जाएं और राज्य सरकार को परमिशन के लिए पत्र लिखवाएं. रेलवे आपको घर तक पहुंचाने के लिए तैयार है.
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रेल किराए पर रेल मंत्री ने दिया यह जवाब
श्रमिक ट्रेनों के किराए के विवाद पर रेल मंत्री ने कहा कि इसमें बहुत ही सरल व्यवस्था की गई थी. ऐसी स्पेशल ट्रेन का जो खर्च होता है उसको मान लीजिए कि यदि वो 100 रुपये होता है तो उसमें 85 रुपये केन्द्र सरकार और खुद रेलवे ने अपने ऊपर लिया. अगर घोषणा कर दी जाए कि सबकुछ मुफ्त है तो लाखों की संख्या में लोग पहुंच जाएंगे. व्यवस्था चरमरा जाएगी. बांद्रा में आपने देखा था कैसे लॉ एंड ऑर्डर की धज्जियां उड़ीं. हमने राज्य सरकार से कहा कि हम आपको ट्रेन की टिकट दे देंगे उसका पैसा आप चाहें तो खुद दें या किसी और माध्यम से दें या यात्रियों से वसूल करें. कुछ राज्यों ने खुद पैसा दिया. कुछ राज्यों ने कहा कि हम यात्रियों को वो पैसा वापस कर देंगे जैसे बिहार ने कहा. व्यवस्था अच्छी थी, लेकिन कुछ विपक्षियों ने उसमें विवाद पैदा करने की कोशिश की.
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रेल मंत्री बोले आने वाले वक्त में बदल जाएगी रेल यात्रा
ट्रेन में सोशल डिस्टेंसिंग और लॉकडाउन के बाद की रेलयात्रा को लेकर रेल मंत्री ने कहा कि अब पूरी दुनिया को नए अंदाज में यात्रा करनी पड़ेगी. चाहे वो बस हो, रेल हो या टैक्सी हो. पूरे विश्व ने स्वीकार कर लिया है कि कोरोना महामारी से लड़ने के लिए जब तक इसकी वैक्सीन नहीं आ जाती है तब तक यात्रा का तरीका बदलेगा. रेलवे को भी उसी के मुताबिक चलना होगा. उदाहरण के लिए अब हम बेड रोल नहीं दे पाएंगे. अब हमें बिस्तर देना, चद्दर देना, तकिया देना, कंबल देना संभव नहीं. महामारी की वजह से ये सब असंभव होगा. गरम खाना आगे मुश्किल होगा क्योंकि संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ जाएगी. भारत की यात्रा में आपको नई व्यवस्था देखने को मिलेगा.