प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर अपने चिर-परिचित अंदाज में भाषण देते हुए विपक्ष पर जमकर निशाना साधा. हालांकि 17वीं लोकसभा के गठन के बाद पहले सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई बहस के दौरान सत्ता और विपक्ष दोनों ओर से कई बड़े नेता नहीं बोले और देश नई सरकार के अस्तित्व में आने के बाद इन नेताओं के शुरुआती विचार जानने से वंचित रह गया.
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के भाषण पर लोकसभा में बहस पर चर्चा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को जवाब दिया, हालांकि संसद के इस निचली सदन में उन्हीं की पार्टी के कई बड़े नेताओं समेत पहली बार चुनकर संसद पहुंचे अन्य क्षेत्रों के दिग्गजों ने अपने विचार रखने से परहेज किया, सिर्फ सत्ता पक्ष ही नहीं बल्कि विपक्ष की ओर से कई दिग्गज सिर्फ सदन में श्रोता के रूप में बैठे रहे.
जिन्होंने बोलने से बनाई दूरी
अमित शाहः भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में पार्टी को कई बड़ी जीत दिलाने वाले अमित शाह पहली बार लोकसभा पहुंचने वाले बड़े नेताओं में पहले नंबर पर रहे. जोरदार भाषण देने वाले अमित शाह से उम्मीद थी कि वो बतौर लोकसभा सांसद इस बहस में शामिल होंगे और केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में अपने विचार रखेंगे जिसे जनता सुनेगी. हालांकि वह इसमें शामिल नहीं हुए.
राहुल गांधीः अमेठी में लोकसभा चुनाव में हार के बावजूद वायनाड से जीतकर लोकसभा पहुंचे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रपति कोविंद के भाषण पर चली बहस में शामिल होने से दूरी बनाए रखी. प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के दौरान वह सदन में मौजूद जरुर रहें, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा.
अखिलेश यादवः करीब ढाई साल पहले मुलायम सिंह यादव को हटाकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष पद पर काबिज होने वाले अखिलेश यादव चौथी बार लोकसभा पहुंचे थे. पिछली 3 बार कन्नौज का प्रतिनिधित्व करने वाले अखिलेश ने इस बार राजनीतिक समीकरण साधने के चलते आजमगढ़ से चुनाव लड़ने का फैसला लिया और बड़ी जीत के साथ एक बार फिर लोकसभा में पहुंचे. पिछली 3 बार की जगह इस बार वह बतौर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष के रूप में सांसद बने थे. उनसे उम्मीद थी कि वह उत्तर प्रदेश जैसे अहम राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए सरकार के सामने अपनी बात रखेंगे, लेकिन वह सदन में ही उपस्थित नहीं रहे. उनके बारे में यह भी स्पष्ट नहीं है कि सदन की कार्यवाही चलने के दौरान वह देश में हैं भी या नहीं.
सनी देओलः फिल्म अभिनेता से नेता बने सनी देओल पहली बार लोकसभा पहुंचे और माना जा रहा था कि वह राष्ट्रपति कोविंद के अभिभाषण पर बहस में शामिल होंगे और अपनी बात रखेंगे. लेकिन उन्होंने भी इससे किनारा किया और बहस में शामिल नहीं हुए.
गौतम गंभीर (फाइल फोटो-के आसिफ)
गौतम गंभीरः अब बात करते हैं क्रिकेटर से नेता बने गौतम गंभीर की. लोकसभा चुनाव लड़ने से ठीक पहले वह भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हुए और ईस्ट दिल्ली संसदीय क्षेत्र से सांसद बने. क्रिकेट के मैदान पर बेहद मुखर दिखने वाले गंभीर के बारे में माना जा रहा था कि राजनीति के मैदान में पहली जीत हासिल करने के बाद वह राष्ट्रपति कोविंद के भाषण में हिस्सा लेते हुए अपने विचार रखेंगे और पूरा सदन उनके तेवर को देखेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
वरुण गांधीः राहुल गांधी के चचेरे भाई और पीलीभीत से सांसद बने वरुण गांधी ने भी राष्ट्रपति के अभिभाषण में हिस्सा नहीं लिया. तीसरी बार लोकसभा पहुंचे वरुण गांधी सदन में ज्यादा सक्रिय नहीं दिखते हैं और इस बार भी उनकी शुरुआत फीकी रही. 17वीं लोकसभा की पहली बहस में उन्होंने हिस्सा नहीं लिया. वह 2009 में पहली बार पीलीभीत से सांसद बने थे और इसके बाद 2014 में सुल्तानपुर से सांसद चुने गए थे.
स्मृति ईरानी (फाइल फोटो- शैलेष रावल)
17वीं लोकसभा का पहली बड़ी बहस से ये नेता नदारद रहे, लेकिन उम्मीद है कि आने वाले समय में देश के ज्वलंत मुद्दों पर अपने विचार रखेंगे और लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर को उनकी मौजूदगी का फायदा मिलेगा.