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राफेल में लगी ये दो मिसाइलें बनेंगी गेमचेंजर, दुश्मनों का कर देंगी सर्वनाश

मिटिओर नेक्स्ट जेनरेशन की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है. इसे एमबीडीए ने इंग्लैंड, जर्मनी, इटली, फ्रांस, स्पेन और स्वेडन की मांग को देखते हुए तैयार किया है.

भारत को 59,000 करोड़ रुपये की लागत पर 36 राफेल विमान मिलेंगे (फाइल फोटो) भारत को 59,000 करोड़ रुपये की लागत पर 36 राफेल विमान मिलेंगे (फाइल फोटो)

  • मिटिओर, स्काल्प मिसाइलों के चलते राफेल और ज्यादा मारक साबित होगा
  • भारत 36 राफेल विमानों में से पहले चार विमान मई 2020 तक प्राप्त करेगा

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह आठ अक्टूबर को फ्रांस में पहला राफेल लड़ाकू विमान प्राप्त करेंगे. वे उसी दिन दो सीटों वाले विमान के ट्रेनर वर्जन में उड़ान भी भरेंगे. इस बीच यूरोपीय मिसाइल कंपनी एमबीडीए ने कहा है कि राफेल में अति आधुनिक मिटिओर और स्काल्प मिसाइलें तैनात होंगी जो दुश्मनों के लक्ष्य को काफी गहराई तक भेदने में कारगर साबित होंगी. इन दोनों मिसाइलों के चलते राफेल और ज्यादा मारक साबित होगा.

मिटिओर और स्काल्प में क्या है अंतर?

भारत को 59,000 करोड़ रुपये की लागत पर 36 राफेल विमान मिलेंगे जिनमें तैनात मिटिओर और स्काल्प मिसाइलें भारत को हवा से हवा में मार करने की अद्भुत क्षमता प्रदान करेंगी. बता दें, भारत 36 राफेल लड़ाकू विमानों में से पहले चार विमान मई 2020 तक प्राप्त करेगा. मई 2020 तक चार राफेल लड़ाकू विमान भारत को मिलेंगे.

एमबीडीए के भारत प्रमुख लोइक पिडवाशे ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, 'राफेल के साथ भारत को ऐसी क्षमता मिलने वाली है जो पहले कभी नहीं थी. भारतीय वायुसेना के लिए दोनों मिसाइलें मिटिओर और स्काल्प गेमचेंजर साबित होंगे.' रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह फ्रांस में आठ अक्टूबर को जब पहला राफेल आधिकारिक रूप से लेंगे तो उसमें वे उड़ान भरेंगे. वे दो सीटों वाले ट्रेनर विमान में उड़ान भरेंगे.

दसॉ एविएशन के साथ करार

भारत ने लड़ाकू जेट बनाने वाली कंपनी दसॉ एविएशन के साथ एक करार किया है, जिसके मुताबिक फ्रांस की इस कंपनी को भारत को 36 राफेल विमान देने हैं. इन्हीं में से एक को प्राप्त करने के लिए रक्षा मंत्री फ्रांस जाएंगे. विमान को औपचारिक रूप से प्राप्त करने के लिए 8 तारीख  को इसलिए चुना गया क्योंकि इस साल दशहरा आठ अक्टूबर को है और भारत में वायु सेना दिवस भी आठ अक्टूबर को मनाया जाता है.

सबसे खतरनाक मिटिओर मिसाइल

एमबीडीए के भारत प्रमुख लोइक पिडवाशे ने कहा, राफेल एक शानदार विमान है, जिसमें जबरदस्त मारक हथियार शामिल हैं. दुनिया भर के कई देशों में यह बेहद अहम साबित हुए हैं. भारत को 36 राफेल सप्लाई का हिस्सा बनकर हम काफी खुश हैं.' पिडवाशे ने कहा, मिटिओर को विजुअल रेंज मिसाइल की श्रेणी में दुनिया में सबसे खतरनाक माना जाता है. इसके अलावा स्काल्प दुश्मन के लक्ष्य को काफी अंदर तक भेदने में सक्षम है. इन दोनों मिसाइलों से भारत के पास निर्णायक हवाई क्षमता मौजूद होगी. उन्होंने आगे कहा, भारत के पास मौजूदा समय में ऐसी क्षमता नहीं है.

मिटिओर नेक्स्ट जेनरेशन की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है. इसे एमबीडीए ने इंग्लैंड, जर्मनी, इटली, फ्रांस, स्पेन और स्वेडन की मांग को देखते हुए तैयार किया है. मिटिओर को एक्टिव रडार से गाइड किया जाता है, जिसे हर मौसम में प्रयोग में लिया जा सकता है. इस मिसाइल को लड़ाकू विमानों के अलावा यूएवी से भी छोड़ा जा सकता है.

फिर सर्जिकल स्ट्राइक को तैयार स्काल्प मिसाइल

स्काल्प मिसाइल लंबी दूरी तक अंदर तक मार कर सकती है. इसके जरिए किसी निश्तिच लक्ष्य पर सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कार्रवाई आसानी से अंजाम दी जा सकती है. यह मिसाइल यूके की रॉयल एयर फोर्स और फ्रेंच एयरफोर्स का हिस्सा है. खाड़ी युद्ध में इस मिसाइल का जमकर इस्तेमाल किया गया था. बता दें कि भारतीय आसमान में पहला राफेल लड़ाकू विमान मई 2020 में दिखेगा. एयरफोर्स दिवस आठ अक्टूबर को है. भारत 36 राफेल लड़ाकू विमानों में से पहले चार विमान मई 2020 तक प्राप्त करेगा.

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