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केरल: कॉलेज में लगी भगवान अय्यपा को जन्म देती महिला की तस्वीर, भड़के लोग

भाजपा के स्थानीय नेताओं ने इस पोस्टर पर कड़ी आपत्ति जताई है. बीजेपी ने पुलिस को लिखित में शिकायत देकर कहा है कि अयप्पा भक्तों और हिन्दू समाज के लोगों की भावनाओं को चोट पहुंचाने के लिए ये पोस्टर लगाया गया है. बीजेपी ने इस पोस्टर के खिलाफ शहर में प्रदर्शन भी किया.

भगवान अयप्पा की तस्वीर (फाइल फोटो) भगवान अयप्पा की तस्वीर (फाइल फोटो)

केरल के एक कॉलेज में लगे पोस्टर से लोग बेहद नाराज हैं. इस पोस्टर में बने चित्र में एक महिला भगवान अयप्पा को जन्म देती दिख रही है. इस पोस्टर से स्थानीय लोग गुस्से में हैं, बीजेपी ने पोस्टर के खिलाफ आपत्ति भी दर्ज कराई है.

रिपोर्ट के मुताबिक केरल के त्रिशूर में स्थित श्री केरलावरम कॉलेज में ये पोस्टर लगाया गया है. आरोप है कि वामपंथी छात्र संगठन स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के छात्रों ने ये पोस्टर लगाया है. इस पोस्टर में एक महिला भगवान अयप्पा को जन्म देती दिख रही है, उसके पैर में खून भी लगा है.

स्थानीय बीजेपी नेताओं ने इस पोस्टर पर कड़ी आपत्ति जताई है. बीजेपी ने पुलिस को लिखित में शिकायत देकर कहा है कि अयप्पा भक्तों और हिन्दू समाज के लोगों की भावनाओं को चोट पहुंचाने के लिए ये पोस्टर लगाया गया है. बीजेपी ने इस पोस्टर के खिलाफ शहर में प्रदर्शन भी किया. उन्होंने पुलिस से मांग की कि इस विवादित पोस्टर को तुरंत हटाया जाए नहीं तो उग्र आंदोलन किया जाएगा.

स्थानीय लोगों की बढ़ती नाराजगी देख पुलिस दल-बल के साथ कॉलेज पहुंची और इस पोस्टर को हटा दिया. पुलिस मामले की जांच कर रही है. बीजेपी ने कहा है कि कुछ लोग समाज में अशांति फैलाने और भावनाएं आहत करने के लिए ऐसी तस्वीरें लगाते हैं.

दक्षिण के सर्वमान्य देव हैं अयप्पा स्वामी

बता दें कि अयप्पा स्वामी दक्षिण भारत के बड़े देवता हैं. केरल के सबरीमाला में भगवान अयप्पा का मंदिर है. इस मंदिर में दुनिया भर से लोग भगवान शंकर के पुत्र अयप्पा का दर्शन करने आते हैं. इस मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं का प्रवेश वर्जित है. बीते साल सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी थी, जिसके बाद इस पर विवाद हुआ था.

भगवान अयप्पा का मंदिर पहाड़ियों की श्रृंखला सह्याद्रि के बीच में बसा है. घने जंगलों, ऊंची पहाड़ियों के बीच स्थित इस मंदिर में आना एक दुष्कर कार्य होता है. यहां आने के लिए श्रद्धालुओं को 41 दिनों तक कठिन अनुशासन का पालन करना पड़ता है.

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