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PM मोदी और जस्टिन ट्रूडो के बीच होगी द्विपक्षीय वार्ता, उपेक्षा हुई या अपेक्षा है ज्यादा...

सरकार के सूत्रों का कहना है कि उनका दौरा पूरी तरह से प्रोटोकॉल के मुताबिक ही हो रहा है और किसी तरह के उपेक्षा की बात बेमानी है. तो क्या यह माना जाए कि जस्टिन ट्रूडो के स्वागत के तरीकों को लेकर ज्यादा अपेक्षा की जा रही है?

ताजमहल के सामने कनाडा के पीएम जस्टि‍न ट्रूडो ताजमहल के सामने कनाडा के पीएम जस्टि‍न ट्रूडो

कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे. उसी दिन दोनों नेताओं के बीच द्व‍िपक्षीय वार्ता होगी. भारत दौरे पर उनकी उपेक्षा को लेकर मीडिया में कई तरह की खबरें आई हैं, लेकिन सरकार के सूत्रों का कहना है कि उनका दौरा पूरी तरह से प्रोटोकॉल के मुताबिक ही हो रहा है और किसी तरह के उपेक्षा की बात बेमानी है. तो क्या यह माना जाए कि जस्टिन ट्रूडो के स्वागत के तरीकों को लेकर ज्यादा अपेक्षा की जा रही है?

सरकारी सूत्रों का कहना है कि किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष की अगवानी कोई कैबिनेट मिनिस्टर ही करता है और जरूरी नहीं कि हर बार पीएम मोदी प्रोटोकॉल तोड़कर खुद स्वागत करने पहुंच जाएं. हालांकि, पीएम के एयरपोर्ट न पहुंचने को तो तार्किक माना जा सकता है, लेकिन सरकार के विरोधी इस पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं कि आगरा में आखिर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और अहमदाबाद में गुजरात के सीएम विजय रूपाणी जस्टिन ट्रूडो के साथ क्यों नहीं दिखे. गौरतलब है कि इसके पहले चीन और जापान के राष्ट्राध्यक्ष के भारत दौरे के समय खुद पीएम मोदी उन्हें लेकर गुजरात गए थे.

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो परिवार समेत अपने सात दिवसीय दौरे पर शनिवार को नई दिल्ली पहुंचे थे. जस्टिन ट्रूडो यूपी और गुजरात का दौरा कर चुके हैं. वह बुधवार को अमृतसर के स्वर्णमंदिर भी जाएंगे. ऐसा कहा जा रहा है कि कनाडा सरकार द्वारा खालिस्तान समर्थकों पर सख्त कार्रवाई न करने से पीएम मोदी नाराज हैं. हालांकि सरकार ने इस पर चुप्पी साध रखी है.

वैसे चर्चा कुछ भी हो, सच तो यह है कि कनाडा, हमारे देश के लिए महत्वपूर्ण देश है. वहां करीब 12 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं. वहां तो भारतीय मूल के एक व्यक्ति को अगले पीएम का दावेदार तक माना जा रहा है. अभी ही जस्टि‍न के कैबिनेट में चार सिख मंत्री हैं. कनाडा सरकार ने अपने यहां नागरिकता के नियम काफी आसान बनाए हैं.

जस्ट‍िन की इस यात्रा का लक्ष्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाना है. व्यापार एवं निवेश, ऊर्जा, विज्ञान एवं इनोवेशन, उच्च शिक्षा, बुनियादी ढांचा विकास, कौशल विकास और शांति जैसे आपसी हितों के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दोनों देश संबंधों को मजबूत करेंगे। सुरक्षा एवं आतंकवाद से मुकाबले में सहयोग के साथ ही वैश्विक एवं क्षेत्रीय मुद्दे भी इस यात्रा के महत्वपूर्ण अंग हैं.

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