सरकार ने सभी राज्यों को दवा दुकानों पर जेनेरिक दवाएं रखने का आदेश जारी किया था. लेकिन अब ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट में बदलाव करने का सरकार मन बना रही है.
इसके तहत अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय फॉर्मासिस्ट्स को डॉक्टर की तरह मरीज को जेनेरिक दवाएं देने का अधिकार देगा. बताया जा रहा है कि इससे डॉक्टरों पर भी जेनेरिक दवाएं लिखने का दवाब बढ़ेगा.
मालूम हो कि सरकार लंबे समय से मरीजों को जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने की पक्षधर है. कई बार राज्यों को पत्र लिख डॉक्टरों से जेनेरिक या सॉल्ट ही पर्ची पर लिखने के निर्देश दिए हैं. बावजूद इसके अभी तक इसमें परिवर्तन देखने को नहीं मिला है. अब मंत्रालय इसे एक्ट के जरिए लागू करने वाला है.
बढाए जाएंगे फॉर्मासिस्ट्स के अधिकार
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बीते सप्ताह जेनेरिक दवाओं को लेकर हुई बैठक में फॉर्मासिस्ट्स को लेकर चर्चा हुई थी. इसके बाद फैसला लिया है कि फॉर्मासिस्ट्स के अधिकारों को बढ़ाया जाए. ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट में आने वाले दिनों में यह बदलाव किया जाएगा.
इसके तहत अगर किसी मरीज की पर्ची पर ब्रांडेड दवाएं लिखी हैं और उसी सॉल्ट की जेनेरिक दवाएं उपलब्ध हैं तो वह मरीज को दवा देने का अधिकार रख सकेगा.
आयुर्वेद और होमियोपैथी का भी होगा विकल्प
अधिकारी ने बताया कि बीते दिनों हुई एक रिसर्च में एलोपैथ की महंगी दवाओं की ही तरह आयुर्वेद, होमियोपैथ और यूनानी पद्धति की दवा में कई विकल्प सुझाए गए. इसके तहत लागत और अधिकतम विक्रय मूल्य में 10 से 20 गुणे तक का अंतर पाया गया है. जिसके बाद इन चिकित्सा पद्धतियों की दवा का भी जेनेरिक संस्करण बाजार में उतारा जाएगा.
पहले चरण में 80 दवाएं
पहले चरण में 80 दवाओं की तैयारी की जा रही है. इसमें वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की बीजीआर-34 और डीआरडीओ की ल्यूकोस्किन दवा भी शामिल है. बता दें कि बीजीआर-34 मधुमेह और ल्यूकोस्किन दवा सफेद दाग के लिए मरीजों को दी जाती है.