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ICJ में जाधव के खिलाफ लड़ने वाले पाक वकील कर चुके हैं भारत की पैरवी

कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस आरोप का खंडन किया कि कुरैशी की नियुक्ति के लिए भारतीय वकीलों को नजरअंदाज किया गया था. उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी मूल के कुरैशी ब्रिटेन के नागरिक हैं और बतौर स्वतंत्र वकील काम करते हैं. उनके मुताबिक पाकिस्तान भी कई मामलों में भारतीय मूल के वकीलों की मदद लेता रहा है.

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जो पाकिस्तानी वकील अंतर्राष्ट्रीय न्यायिक अदालत में जाधव की फांसी पर रोक का पुरजोर विरोध करते नजर आए, कभी वही खावर कुरैशी ब्रिटेन में भारत की पैरवी कर चुके हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि 2004 में यूपीए की सरकार ने अमेरिकी ऊर्जा कंपनी एनरॉन के खिलाफ केस लड़ने के लिए कुरैशी की सेवाएं ली थीं.

क्या था मामला?
महाराष्ट्र के डाभोल में पावर प्लांट लगाने का ठेका एनरॉन कंपनी को दिया गया था. लेकिन बिजली की कीमत और प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद ये परियोजना खटाई में पड़ गई. नतीजतन एनरॉन कंपनी ने भारत की सरकार पर 6 बिलियन डॉलर का दावा ठोका था. मामला आखिर में अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत तक पहुंचा था. साल 2004 में जब यूपीए की सरकार ने सत्ता संभाली तो मामले को देख रही पूरी लीगल टीम को बदल दिया गया और इस मामले की पैरवी के लिए कुरैशी को चुना गया. खबरों के मुताबिक ब्रिटेन की लॉ कंपनी फॉक्स मंडल की सिफारिश पर कुरैशी को ये जिम्मा सौंपा गया था.

कांग्रेस की सफाई
कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस आरोप का खंडन किया कि कुरैशी की नियुक्ति के लिए भारतीय वकीलों को नजरअंदाज किया गया था. उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी मूल के कुरैशी ब्रिटेन के नागरिक हैं और बतौर स्वतंत्र वकील काम करते हैं. उनके मुताबिक पाकिस्तान भी कई मामलों में भारतीय मूल के वकीलों की मदद लेता रहा है. लिहाजा ये कोई मुद्दा नहीं है.

बीजेपी का वार
लेकिन बीजेपी इस सफाई से संतुष्ट नहीं है. पार्टी प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने पूछा कि कांग्रेस को क्यों पाकिस्तानी वकील ही पसंद आया? उन्होंने याद दिलाया कि उस वक्त भी भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते मधुर नहीं थे.


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