scorecardresearch
 

पीए संगमा का अंतिम संस्कार, उमड़ी भीड़

'किंग ऑफ गारो' के नाम से मशहूर रहे पीए संगमा को तुरा स्थित डिक्की बांदी स्टेडियम में 21 बंदूकों की सलामी दी गई. इसके बाद पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया.

Advertisement
X

पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पी.ए. संगमा के अंतिम संस्कार के साथ ही नॉर्थ-ईस्ट के राजनीतिक इतिहास में एक स्वर्णिम युग का अंत हो गया. मेघालय के तुरा स्थित उनके गृहनगर में हुए अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे.

'किंग ऑफ गारो' के नाम से मशहूर रहे संगमा को तुरा स्थित डिक्की बांदी स्टेडियम में 21 बंदूकों की सलामी दी गई. इसके बाद पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया. इस दौरान मेघालय के विधानसभा अध्यत्र ए.टी. मोंडल, मुख्यमंत्री डॉ. मुकुल संगमा और उनकी कैबिनेट के कई मंत्रियों समेत करीब 15000 लोग जमा हुए थे.


लोगों ने कहा कि अपने 40 साल के राजनीतिक करियर में संगमा ने नॉर्थ-ईस्ट के लोगों की भलाई के लिए काम किया और देश के दूसरे हिस्सों से नॉर्थ-ईस्ट को जोड़ने की लड़ाई लड़ी. उनके कामों ने ही देश-दुनिया में गारो जनजाति के लोगों और 'संगमा' उपनाम को पहचान मिली.

Advertisement


मेघालय के मुख्यमंत्री डॉ. मुकुल शर्मा ने कहा, 'उनकी आवाज भले ही शांत हो गई हो लेकिन उनके काम हमेशा याद किए जाएंगे. वह युवाओं के प्रेरणास्रोत रहेंगे.'

Advertisement
Advertisement