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तिहाड़ में बंद ओम प्रकाश चौटाला की तबीयत बिगड़ी, अस्‍पताल में भर्ती

तिहाड़ जेल में बंद हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला को सांस की तकलाफ की वजह से जीबी पंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

ओमप्रकाश चौटाला ओमप्रकाश चौटाला

तिहाड़ जेल में बंद हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला को सांस की तकलाफ की वजह से जीबी पंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

रोहिणी कोर्ट ने 13 साल पहले हुए शिक्षक भर्ती घोटाले में उन्हे दोषी ठहराया था. इस मामले में 22 जनवरी को उन्हे सजा सुनाई जानी है. चौटाला ने कोर्ट से कहा था कि वो डायबिटीज़ के मरीज हैं और उनकी उम्र 80 साल से ऊपर है, इसलिए उनके साथ नरमी बरती जाए.

क्या था पूरा मामला?
ओमप्रकाश चौटाला पर आरोप था कि उन्होंने हरियाणा राज्य के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए शिक्षकों की भर्ती की जिम्मेदारी कर्मचारी चयन आयोग से लेकर जिला स्तर पर बनाई गई कमेटी को सौंपने का निर्देश दिया था.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने जेबीटी शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच वर्ष 2003 में शुरू की. शिक्षकों की नियुक्ति में बरती गई अनियमितताओं का आरोप सामने आने के बाद सीबीआई ने जनवरी 2004 में हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला सहित कुल 62 लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज किया. जांच एजेंसी ने वर्ष 2008 में आरोपियों के विरुद्घ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया.

आरोपपत्र के अनुसार वर्ष 1999-2000 में राज्य के 18 जिलों में हुई 3206 जेबीटी शिक्षकों की भर्ती के मामले में मानदंडों को ताक पर रखकर मनचाहे अभ्यर्थियों की बहाली की गई. इसके लिए शिक्षकों की भर्ती की जिम्मेवारी कर्मचारी चयन आयोग से लेकर जिला स्तर पर बनाई गई चयन कमेटी को सौंपी गई थी. इसने फर्जी साक्षात्कार के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों की सूची तैयार की.इसके लिए जिला स्तरीय चयन कमेटी में शामिल शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर मनचाहे अभ्यर्थियों के चयन के लिए दिल्ली के हरियाणा भवन व चंडीगढ़ के गेस्ट हाउस में बैठकों में दबाव भी बनाया गया था.

कैसे सामने आया शिक्षक भर्ती घोटाला?
यह घोटाला वर्ष 1999 से 2000 के मध्य का है, जिसमें 3206 से अधिक शिक्षकों की भर्ती की गई थी. शिक्षा विभाग के ही एक आईएस अधिकारी संजीव कुमार ने वर्ष 2003 में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दर्ज की, जिसके बाद  जांच सीबीआई को सौंप दी गई.

जेबीटी भर्ती में ओम प्रकाश चौटाला पर लिस्ट बदलवाने का आरोप था, जो अदालत में साबित हो गया. इस केस में कुल 148 सरकारी गवाह थे, जिनमें से 67 की गवाही अदालत में हुई और यह साबित हुआ कि जेबीटी भर्ती में नौकरी पाने वाले हर व्यक्ति से 3 से 5 लाख रुपए की रिश्वत ली गई थी.

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