एम्स नेत्र विभाग के रिसर्च विंग ने आंखों के रेटिना में होने वाली कमजोरी का कारण जानने के लिए फलों और सब्जियों में मौजूद पौष्टिक तत्वों की जांच शुरू की और उसके जो परिणाम आए, वो चौंकाने वाले थे. लगभग तीन साल तक चली इस स्टडी में पता चला कि दक्षिण भारत में जो फल और सब्जियां मिलती हैं, उनमें दिल्ली-एनसीआर में मिलने वाले फल और सब्जियों के मुकाबले पौष्टिक तत्वों की मात्रा बहुत ज्यादा है.
आप सोच रहे होंगे कि रेटिना में मौजूद मैकूला का फल-सब्जियों की स्टडी से क्या लेना-देना. आपका भ्रम हम दूर कर देते हैं. मैकूला रेटिना का वो भाग है जहां से बहुत साफ दिखाई देता है लेकिन 50-55 साल के आसपास ये कमजोर पड़ने लगती है. इनमें मौजूद सेल्स को स्वस्थ रहने के लिए जिस भोजन की जरूरत पड़ती है वो फलों और सब्जियों में मौजूद कैरोटीनोइड्स तत्व होता है. इसी तरह फलों और सब्जियों में मौजूद लाइकोपीन जो मुख्यत: टमाटर में पाया जाता है बीटा कैरोटीन जो गाजर मे ज्यादा मिलता है, भी मैकूला की सेल्स को भोजन की आपूर्ति कराते है. एम्स के रिसर्च विंग ने इस बात की जांच के लिए कई तरह से काम शुरू किया.
तीन साल तक चली स्टडी
डॉ. आलोक कुमार रवि ने बताया कि शुरुआत में दक्षिण भारत के चेन्नई और तमिलनाडु और आसपास के इलाकों से और नॉर्थ इंडिया विशेषकर एनसीआर से 51 सब्जियों और 20 फलों के नमूने अलग-अलग 10 और 12 जगहों से लिए गए थे. इनमें मौजूद पौष्टिक तत्वों की जांच का काम लगभग तीन साल चला. जांच में पाया गया कि दिल्ली-एनसीआर से मिलने वाली सब्जियों में कैरोटीनोइड्स (carotenoids) के अलावा और प्राकृतिक तत्वों की मात्रा कम थी जबकि दक्षिण भारत में मिलने वाले फलों और सब्जियों के नमूने में इसकी मात्रा बहुत ज्यादा थी. ये भी पता चला कि अलग-अलग फल सब्जियों में पौष्टिक तत्वों की मौजूदगी का अंतर भी अलग-अलग था. कुछ में ये बहुत ज्यादा था जैसे कि दिल्ली-एनसीआर में बिकने वाले काले अंगूर में पौष्टिक तत्वों की मात्रा 14.70 थी और दक्षिण भारत में इसकी मात्रा 24.90 मिली. इसी तरह अमरूद में इसकी मात्रा 38.40 और दिल्ली में बिकने वाले अमरूद में पौष्टिक तत्वों की मात्रा केवल 6.90 मिली.
डॉ. आलोक ने बताया कि सब्जियों और फलों की गुणवत्ता पर्यावरण, तापमान, खेती के तरीके, खाद आदि पर निर्भर करते हैं और इस स्टडी से सीधे तौर पर संकेत मिलते हैं कि नार्थ इंडिया में उगने वाली सब्जियों में कई कारणों से पौष्टिक तत्व कम है.
फिर भी साउथ इंडिया के लोगों में कैरोटीनोइड्स की मात्रा कम
एम्स ने नार्थ इंडिया से 15 और साउथ इंडिया से 13 रेटिना की जांच की तो पता चला कि दक्षिण भारत के लोगों के रेटिना में मौजूदा मैकूला में कैरोटीनोइड्स की मात्रा कम थी जबकि नॉर्थ में जो लोग थे उनके मैकूला में ये ज्यादा थी. डॉ. आलोक का मानना है ये खानपान पर निर्भर करता है. नॉर्थ के लोग बहुत ज्यादा सब्जियों का सेवन करते हैं और दक्षिण भारत में ये कम है.