हिंदी पट्टी के तीन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की हार को लेकर नेतृत्व को जिम्मेदारी लेनी चाहिए वाले बयान पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सफाई दी है. नितिन गडकरी ने कहा है कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया क्योंकि उन्होंने यह बयान बैंकिंग सेक्टर के लिए दिया था और राजनीति पर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की थी. उन्होंने कहा था कि जीत के कई हकदार होते हैं लेकिन विफलता को कोई स्वीकार नहीं करना चाहता.
केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा है कि पुणे में एक बैंक से संबंधित कार्यक्रम में बात करते वक्त उन्होंने कहने की कोशिश की कि बैंक अगर मुनाफे में आता है तो बैंक की लीडरशीप क्रेडिट लेती है. वैसे ही अगर बैंक या बिजनेस घाटे में चला जाता है तो उसकी जिम्मेदारी भी बैंक के लीडरशिप को लेनी चाहिए. इसी तरह से मैंने कहा था कि अगर राजनीति में चुनाव जीतने का श्रेय लिया जाता है तो पराजय का श्रेय भी लेना चाहिए. मेरे इस वक्तव्य को तोड़ मरोड़कर पेश किया गया. इसका राजनीतिक परिस्थिति या हाल ही में हुए विधानसभा चुनाओं का कोई संबंध नहीं था. उन्होंने कहा कि बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी और मेरा विश्वास है कि उनके नेतृत्व में पूर्ण बहुमत प्राप्त करेगी.
गौरतलब है कि पुणे में जिला शहरी सहकारी बैंक असोसिएशन लिमिटेड द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि राजनीति में हार की समीक्षा के लिए कमेटी बैठती है, लेकिन जब जीत मिलती है तो कोई पूछने वाला नहीं होता. क्योंकि सफलता का श्रेय लेने के लिये लोगों में होड़ रहती है, लेकिन विफलता को कोई स्वीकार नहीं करना चाहता, सब दूसरे की तरफ उंगली दिखाने लगते हैं.
दरअसल सहकारी बैंक कर्मियों को संबोधित करते हुए नितिन गडकरी उदाहरण दे रहे थे कि राजनीति में लोकसभा और विधानसभा में मिली हार के बाद उम्मीदवार बहाना बनाते हैं कि उन्हें पर्याप्त संसाधन नहीं मिला. बड़े नेताओं की सभा मांगी गई थी लेकिन वो भी कैंसिल कर दी, जिसके कारण उनकी हार हुई. गडकरी ने कहा था कि उन्होंने ऐसे नेताओं से कहा कि आप चुनाव हारे क्योंकि आप लोगों का विश्वास पाने में पीछे रह गए. इसलिए अपनी हार की जिम्मेदारी खुद लें, दूसरों पर मत डालें.