निठारी हत्याकांड के 16 मामलों में से एक मामले पर कोर्ट ने सजा सुना दी है. गाजियाबाद की विशेष सीबीआई अदालत ने रिंपा हलदर हत्या कांड में मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली को हत्या का दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई है.
रिंपा हलदर हत्या कांड में मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोहली आरोपी था. अदालत ने दोनों आरोपियों को आईपीसी की धारा 302 के तहत हत्या का दोषी पाया था जिस पर आज उसे फांसी की सजा सुनाई गई.
रिम्पा के परिजनों के वकील ने कहा कि इस फैसले से लोगों का अदालत पर भरोसा बढ़ा है. वहीं पंढेर के बेटे ने कहा कि उसके पिता के साथ अन्याय हुआ है. साथ ही पंढेर के वकील देवराज सिंह ने अदालत के फैसले के बाद कहा कि वो इसे इंसाफ नहीं मानते और न्याय के लिए ऊपर की अदालत तक जाएंगे.
फरवरी 2005 में रिंपा अचानक एक दिन गायब हो गई थी. जुलाई 2005 में गुमशुदगी की खबर दर्ज की गई थी. जांच के दौरान जो खुलासा हुआ, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला था. निठारी की डी-5 कोठी के पास मिले थे 19 बच्चों के कंकाल और जांच हुई तो पता चला कि बेरहमी से कत्ल को अंजाम देने वाले कोई और नहीं बल्कि डी-5 में रहने वाला पंढेर और उसका नौकर कोली ही था. कुल 16 मामले बने और उन्हीं में से एक मामला था रिंपा हत्या कांड.
दिसंबर 2006 में मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली को पकड़ा गया. इसके बाद शुरू हुई अदालती कार्रवाई. दो साल की कानूनी जंग में आखिरकार हत्यारों की हार हो ही गई. माता-पिता को बेटी वापस तो नहीं मिल सकती लेकिन, इंसाफ के मरहम से घाव का दर्द कम जरूर हो गया होगा.