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मोदी सरकार के सामने नया संकट, अल-नीनो के असर से कमजोर पड़ा मानसून

देश में सूखे के आसार बढ़ते जा रहे हैं. मानसून के धोखे ने देश में जबरदस्त सूखे जैसे हालात पैदा कर दिए हैं. मौसम विभाग ने 1 जून से 22 जून तक के जो आंकड़े जारी किए हैं, उसके मुताबिक अनुमान से 36 फीसदी कम बारिश हुई है. देश में फसल पैदा करने वाले राज्यों में इसका खासा असर देखा जा रहा है.

देश में बढ़े सूखे के आसार देश में बढ़े सूखे के आसार

देश में सूखे के आसार बढ़ते जा रहे हैं. मानसून के धोखे ने देश में जबरदस्त सूखे जैसे हालात पैदा कर दिए हैं. मौसम विभाग ने 1 जून से 22 जून तक के जो आंकड़े जारी किए हैं, उसके मुताबिक अनुमान से 36 फीसदी कम बारिश हुई है. देश में फसल पैदा करने वाले राज्यों में इसका खासा असर देखा जा रहा है.

मौसम विभाग के मुताबिक इस बार मानसून की बारिश सामान्य से बहुत कम रहने वाली है. हर रोज मानसून को लेकर चौंकाने वाले आकंड़े सामने आते हैं. मौसम विभाग ने 1 जून से 22 जून तक के जो आंकड़े जारी किए हैं, उसके मुताबिक अनुमान से 36 फीसदी कम बारिश हुई है. हालांकि अब मानसून कमजोर हालत में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश तक पहुंच चुका है.

उत्तर भारत में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के तमाम इलाकों में आने वाले दिनों में बारिश की कमी के चलते तमाम समस्याओं का सामना लोगों को करना पड़ेगा. अगर आशंका सच साबित हुई तो सूखा पड़ना तय है. इसी के मद्देनजर मोदी सरकार ने तमाम वो तैयारियां शुरू कर दी है जो सूखे से निपटने के लिए की जाती है. कृषि मंत्रालय की बागडोर संभाले कृषि मंत्री राधामोहन रात-दिन इसी जुगत में लगे हुए हैं कि कैसे आने वाले दिनों में खेतीबाड़ी में सूखे से होने वाले नुकसान से बचा जाए. इसी के मद्देनजर कृषि मंत्रालय ने 500 जिलों के लिए सूखा प्रबंधन की योजना तैयार कर ली है.

अल-नीनो का ग्रहण लगने की आशंका
मानसून के जानकारों का कहना है कि अभी तक की स्थिति की बात करें तो मानसून के हालात ठीक नहीं दिख रहे हैं. जून के महीने में तकरीबन हफ्ते भर का समय बाकी है और इस दौरान बारिश की स्थिति में किसी खास सुधार की संभावना कम दिख रही है. मानसून के लिहाज से जुलाई और अगस्त के महीने में झमाझम बारिश देखी जाती है लेकिन इस बार जुलाई-अगस्त की बारिश पर अल-नीनो का ग्रहण लगने की आशंका जाहिर की जा रही है. इस वजह से मानसून की बारिश अगर बुरी तरह से प्रभावित हुई तो देश के तमाम इलाकों में खेती को खासा नुकसान पहुंच सकता है. इससे खाने पीने की चीजें महंगी होने की संभावना जोरदार है. लिहाजा जहां एक तरफ मानसून की कमी लोगों को सताएगी तो वहीं दूसरी तरफ चौतरफा महंगाई को रोक पाना मोदी सरकार के लिए मुश्किल ही नहीं नामुमकिन से काम ना होगा.

कहां कितनी कम बारिश
ओडि‍शा में अब तक 60 फीसदी बारिश कम हुई जबकि पश्च‍िमी राजस्थान में 71 व पूर्वी राजस्थान में 48 फीसदी बारिश कम हुई है. पूर्वी यूपी में 54 फीसदी, पश्च‍िमी यूपी में 31 फीसदी कम बारिश हुई है. बिहार में 16 फीसदी, छत्तीसगढ़ में 36 फीसदी बारिश कम हुई है. पंजाब में 74 फीसदी और हरियाणा में 25, गुजरात में 82 फीसदी कम बारिश हुई. मराठवाड़ा में 71 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है.

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