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चंडीगढ़ में 'नेकी की दीवारें' ला रही हैं अमीर-गरीब के बीच गर्माहट

अमीरी और गरीबी के बीच सदियों से एक दीवार खड़ी है. ये दीवार वक्त के साथ-साथ गिरने के बजाए और ऊंची होती रही है लेकिन चंडीगढ़ में दीवारें अब अमीरों को ग़रीबों के करीब ला रही हैं. शहर की एक गैर सरकारी संस्था 'युवसत्ता' ने आम दीवारों को छोटे-बड़े का भेदभाव मिटाने का ज़रिया बना दिया है

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ये दीवारें ग़रीबों के लिए मदद ले कर आई
ये दीवारें ग़रीबों के लिए मदद ले कर आई

अमीरी और गरीबी के बीच सदियों से एक दीवार खड़ी है. ये दीवार वक्त के साथ-साथ गिरने के बजाए और ऊंची होती रही है लेकिन चंडीगढ़ में दीवारें अब अमीरों को ग़रीबों के करीब ला रही हैं. शहर की एक गैर सरकारी संस्था 'युवसत्ता' ने आम दीवारों को छोटे-बड़े का भेदभाव मिटाने का ज़रिया बना दिया है. नेकी की दीवारों के नाम से जानी जाने वाली ये दीवारें अब ग़रीबों के लिए मदद ले कर आई हैं.

दरअसल चंडीगढ़ में कार्यरत एक गैर सरकारी संस्था युवसत्ता ने ग़रीबों को वस्त्र जुटाने के लिए एक पहल की है. कपड़े इकट्ठे करने के लिए उन्होंने पहले शहर की एक दीवार पर एक पाइप लगाकर उसके साथ एक बोर्ड टांग दिया जिसमें लिखा था कि ये नेकी की दीवार है. अगर 'ज़रूरत नही है तो छोड़ जाएं और चाहिए तो ले जाएं' यानी अगर आपके पास फालतू कपड़े और जूते हैं तो आप नेकी की दीवार पर टांग जाएं.

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इस साल के सितंबर महीने से एक नेकी की दीवार से शुरू हुया ये सिलसिला अब सात तक पहुंच गया है. शहर के अमीर लोग फालतू कपड़े, जिनमें नए वस्त्र, ऊनी कपड़े, जूते और चप्पल आदि शामिल हैं, छोड़ जाते हैं और ज़रूरतमंद इन चीज़ों को वहां से उठा लेते हैं.

गैर सरकारी संस्था युवसत्ता द्वारा शुरू की गई इस मुहिम की सराहना की जा रही है. पहले नेकी की ये दीवारें स्कूलों और कॉलेज परिसर की दीवारों पर स्थापित की गई थीं लेकिन संस्था अब इसे रिहायशी इलाक़ों में भी शुरू करने जा रही है. संस्था कपड़ों के अलावा एक फूड बैंक भी चलाती है जहां से ग़रीब अनाज ले सकते हैं.

चंडीगढ़ की इन नेकी की दीवारों के चर्चे दूसरे शहरों में भी होने लगे हैं. इस अनूठे वस्त्र दान को सिरे चढ़ा रही संस्था अब दूसरे शहरों में भी इसे फैलाना चाहती है, ताकि लोग ठंड में ना ठिठुरे और अमीर बड़प्पन की दीवार गिरा कर उनके काम आ सकें.

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