असम राइफल्स के महानिदेशक लेफ्टि. जनरल करण सिंह यादव ने शुक्रवार को कहा कि असम में प्रमुख उग्रवादी संगठन उल्फा में करीब 50 प्रतिशत सदस्य असम से बाहर के हैं और राज्य में उल्फा और अन्य उग्रवादी संगठनों को चीन से हथियारों की कोई आपूर्ति नहीं हो रही है.
यादव ने असम राइफल्स के 175 वें स्थापना दिवस के अवसर पर संवाददाताओं को बताया कि लोगों का यह कहना है कि उग्रवादी संगठन उल्फा में करीब 50 प्रतिशत सदस्य असम से बाहर के लोग हैं. उल्फा और अन्य ऐसे उग्रवादी संगठनों की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए भारत और बांग्लादेश सरकार मिल कर कार्य कर रही हैं. असम राइफल्स के अधिकारियों का बांग्लादेश के सैनिक अधिकारियों के साथ दोनों देशों में घुसपैठ रोकने के संबंध में बराबर बातचीत होती रहती है. भारत की तरह बांग्लोदश सरकार ने अनेक उग्रवादी संगठनों के नेताओं को गिरफ्तार किया है जिससे भारत-बांग्लादेश सीमा पर उग्रवादी संगठनों की गतिविधियां कम हुई हैं.
उन्होंने कहा कि असम राइफल्स भारत की म्यांमार से लगी सीमा पर तैनात है और वहां पर घुसपैठियों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. यादव ने इस बात का खंडन किया कि उग्रवादी संगठन उल्फा और अन्य को चीनी हथियारों की सप्लाई हो रही है और वहां पर कुछ चीनी हथियार मिले हैं. उन्होंने कहा कि चीन की ओर से किसी प्रकार के हथियारों की सप्लाई नहीं हो रही है जो कुछ हथियार मिले है वह स्थानीय हथियार विक्रेताओं द्वारा उपलब्ध कराये गये हैं.
यादव ने बताया कि असम राइफल्स की स्थापना के समय केवल छह बटालियन थी और आज इसमें 46 बटालियन शामिल हैं. इसकी उपलब्धियों और विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इस साल के अंत तक इसमें 26 और बटालियन शामिल करने का आश्वासन दिया है. असफ राइफल्स पूर्वोत्तर भारत में घुसपैठियों की गतिविधियों को रोकने में लगी हुई है. उन्होंने कहा कि हमारे म्यांमार से अच्छे संबंध हैं इस कारण दोनों की सीमाओं में लोगों के आने जाने पर भी कोई पांबदी नहीं लगायी गयी है. म्यांमार और हमारे अधिकारियों की बराबर बैठकें होती रहती हैं.
हिन्दी बोलने वालों को निकाले जाने के संबंध में यादव ने कहा कि उल्फा की यह मांग पहली बार नहीं उठी है, उसका मुख्य नारा है असम केवल असमिया बोलने वालों का है लेकिन उसके संगठन में आधे से अधिक लोग हिन्दी बोलने वाले हैं. उन्होंने कहा कि पहली बार असम राइफल्स के जवान संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में शामिल हो रहे हैं. यादव ने कहा कि बांग्लादेश की प्रधानमंत्री भारत के दौरे पर आ रही हैं. इससे निश्चित रूप से दोनों देशों के आपसी संबंध में सुधार होगा और सीमापार से होने वाली घुसपैठ में कमी आयेगी.