सीनियर एडवोकेट हजारिका ने कहा कि एनआरसी को लागू करने के लिए अलग से कानून बनाने की जरूरत नहीं है. इसके तहत अगर किसी की नागरिकता पर कोई आशंका नहीं है तो यह मान लिया जाता है कि भारत में रहने वाले लोग नागरिक हैं. हालांकि अगर किसी की नागरिकता पर किसी तरह की कोई आशंका होती है, तो उसकी जांच पड़ताल की जाती है. हजारिका ने बताया कि साल 2003 के नियम के तहत एनआरसी में नाम चढ़वाने के लिए किसी खास दस्तावेज की जरूरत नहीं होती है. इसकी वजह यह है कि एनआरसी डोर-टू-डोर सर्वे के जरिए तैयार किया जाता है.
एडवोकेट हजारिका का कहना है कि एनआरसी को लेकर जहां तक असम का सवाल है तो वहां घुसपैठ बड़ी समस्या है. लिहाजा साल 2009 में इस नियम में सुधार किया गया था और नागरिकता साबित करने के लिए कुछ दस्तावेज जरूरी कर दिया गया था. आपको बता दें कि नागरिकता संशोधन अधिनियम और एनआरसी को लेकर देश के कई राज्यों में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं. प्रदर्शनकारी लगातार आगजनी और तोड़फोड़ कर रहे हैं. कई जगह पुलिस पर पथराव किए जा रहे हैं.
नागरिकता संशोधन अधिनियम और एनआरसी के खिलाफ छात्र भी सड़क पर उतरे हुए हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं. दिल्ली, उत्तर प्रदेश और असम में प्रदर्शनकारियों को काबू करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़ रहे हैं. लेकिन प्रदर्शन खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. इसको लेकर राजनीतिक दल भी मोदी सरकार को लगातार घेर रहे हैं और निशाना साध रहे हैं.