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PM पद के लिए मोदी पर मुहर अभी नहीं!

नरेंद्र मोदी का दिल्ली मार्च लगभग तय हो गया है. बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में न केवल चुनावी रणनीति पर महामंथन होना है, बल्कि ये भी तय होना है कि चुनावी महाभारत में मोदी की भूमिका क्या होगी.

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नरेंद्र मोदी
नरेंद्र मोदी

का दिल्ली मार्च लगभग तय हो गया है. में न केवल चुनावी रणनीति पर महामंथन होना है, बल्कि ये भी तय होना है कि चुनावी महाभारत में मोदी की भूमिका क्या होगी.

बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक भले ही मिशन 2014 की रणनीति तय करने के लिए हो, लेकिन बैठक में और बैठक से बाहर पार्टी के तमाम नेता नमो नमो करते नजर आए.

अगले लोकसभा चुनाव में खुद को विकल्प के तौर पर पेश करने के लिए बीजेपी के महामंथन का मूड मोदी के इर्द गिर्द घूमता रहा. बीजेपी के तमाम नेता नरेन्द्र मोदी के समर्थन में आवाज बुलंद करते रहे, तो कई नेता अपने पत्ते खोलने से बचते रहे.

के बाद राष्ट्रीय कार्यकारिणी की ये पहली बैठक है. बैठक में मोदी की धमक का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ने अपने भाषण में गुजरात की तरक्की का खास तौर पर जिक्र किया और मोदी की तारीफ के पुल बांध दिए.

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मोदी की चर्चा होने के बाद करीब एक मिनट तक कार्यकारिणी की बैठक में मौजूद चार सौ से भी ज्यादा नेताओं ने मेज थपथपा कर इसका स्वागत किया. हालांकि बीजेपी की चुनावी मिशन में मोदी की भूमिका को लेकर सस्पेंस बना रहा.

अहमदाबाद से दिल्ली मार्च की हरसत को मोदी ने कभी छुपाया नहीं. हिंदुत्व में विकास का रसायन मिला कर सियासत में गुजरात गाथा लिखने वाले मोदी से बीजेपी और संघ परिवार की उम्मीदें भी बढ़ती दिखी.

संघ और बीजेपी की तरफ से लगातार ये संकेत दिए जाने लगे कि 2014 के चुनावों में मोदी की भूमिका बड़ी की जा सकती है लेकिन सवाल यही है कि क्या मोदी को केंद्र में लाकर बीजेपी दिल्ली की गद्दी के लिए लिए चुनावी महाभारत में उतरेगी.

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